दोघट (बागपत)। बामनौली गांव में वर्ष 2000 के बाद भूमि खरीदने वाले किसानों को चकबंदी ने कंगाल कर दिया है। किसानों ने सोने के भाव जमीन खरीदी, लेकिन चकबंदी ने उनकी जमीन छीन ली। जिन किसानों ने जमीन बेची थी, उनके ही नाम भूमि चढ़ा दी गई। ऐसे 300 से ज्यादा किसान हैं, जो खरीदी गई जमीन पर कब्जा पाने के लिए कई साल से ठोकरे खा रहे हैं।
पूर्व प्रधान महीपाल सिंह दावा करते हैं कि गांव के 300 किसान ऐसे मिले हैं, जिन्होंने वर्ष 2000 के बाद सोने भाव जमीन खरीदी। उन्होंने जमीन को तहसील के अभिलेखों में दर्ज भी कराया, लेकिन जिन किसानों ने जमीन बेची थी, फिर से भूमि उनके नाम पर चढ़ा दी गई। अब ये किसान अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। उनके रुपये भी चले गए और जमीन भी नहीं मिली। बड़ौली निवासी किसान छतर सिंह ने बामनौली गांव में चार बीघा जमीन खरीदी । चकबंदी में उन्हें जमीन नहीं मिली। पुष्पा पत्नी महावीर ने जमीन खरीदी , लेकिन चकबंदी अधिकारियों ने विक्रेता के वारिसों को उसकी ही जमीन बांट दी। इनके अलावा कृष्णपाल पुत्र तिलकराम, मास्टर महेंद्र सिंह, सोरोज पुत्र शिवराम समेत सैंकड़ों किसानों को बैनामा की भूमि नहीं दी।
क्या कहते हैं किसान
किसान सोनू माया, राजवीर सिंह, महीपाल सिंह, महावीर सिंह, इंद्रपाल आदि का कहना है कि चकबंदी अधिकारियों ने हर तरह से किसानों को लूटने का काम किया है। इससे ज्यादा दुर्भाग्य क्या होगा कि आज किसान अपनी ही जमीन के सिस्टम से लड़ रहा है, लेकिन उन्हें इंसाफ मिलने की कोई उम्मीद नहीं है। पूरा सिस्टम अंधा, बहरा हो चुका है। किसानों की कोई सुनने वाला नहीं है। किसानों को आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
भिक्कनपुरा के पांच किसानों के काटे चक
दोघट। बामनौली की चकबंदी में बड़ा ही चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। चकबंदी में पांच किसानों के नाम ऐसे सामने आए हैं, जिनका कुछ पता नहीं है। उनका स्थायी पता भिक्कनपुरा परगना तहसील बड़ौत दर्शाया गया है। जबकि बागपत जिले में भिक्कनपुरा नाम से कोई गांव ही नहीं है। भिक्कनपुरा गांव निवासी अर्जुन सिंह व ज्ञान सिंह पुत्रगण रामदास, जीतू, राम नारायण और हरदेवा पुत्र इंद्रराज के नाम से बामनौली गांव में चक काटे गए हैं। इन्हें कहां पर नोटिस भेजे हैं। इसी तरह से फतेहपुर चक गांव के किसानों के नाम से बामनौली में चक काटे गए है। ऐसे करीब 30 चक काटे गए है, जिनका कोई अता-पता नहीं है। इससे साफ पता चलता है कि चकबंदी प्रक्रिया कागजों पर ही की गई है।
किसान की हालत का जिम्मेदार कौन
दोघट। बामनौली गांव निवासी सोराज पुत्र शिवराम ने वर्ष 2000 के बाद गांव में जमीन खरीदी । चकबंदी में इन्हें भी जमीन नहीं मिली। जमीन पाने के लिए बेटा सुनील लड़ाई लड़ रहा था। चकबंदी से वह इतना परेशान हो गया कि दिमागी संतुलन खो बैठा।