बागपत। रमाला चीनी मिल के विस्तारीकरण की तैयारी शुरू हो गई है। यूपी सरकार ने विस्तारीकरण के लिए चीनी मिल को 150 करोड़ का लोन दिया है। अब 154 करोड़ रुपये चीनी मिल को राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (नाबार्ड) से लोन लेना होगा। चीनी मिल में किसानों का शेयर सिर्फ सात फीसदी होने के कारण लोन की प्रक्रिया में परेशानी है। चीनी मिल को शेयर 10 फीसदी करना पड़ सकता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 23 दिसंबर को किसान दिवस पर रमाला पहुंचकर चीनी मिल के विस्तारीकरण का एलान किया था। यूपी सरकार ने मिल विस्तारीकरण के लिए चीनी मिल को 150 करोड़ रुपये का लोन दिया। इस पर चीनी मिल को ब्याज भी चुकता करना होगा। विस्तारीकरण के लिए बाकी 154 करोड़ रुपये के लिए चीनी मिल ने एनसीडीसी का दरवाजा खटखटाया है। इसमें किसानों का शेयर सिर्फ सात फीसदी कम होना बाधा बना हुआ है। चीनी मिल के जीएम जेएस चौहान ने कहा कि लोन की प्रक्रिया चल रही है। जो विसंगतियां हैं, उनका निपटारा कर लिया जाएगा।
विस्तारीकरण पर रहेगी किसानों की निगरानी
रमाला। सहकारी चीनी मिल में अधिकारियों और किसानों की बैठक हुई। इसमें पांच सदस्य कमेटी का गठन किया। कमेटी मिल में चल रहे विस्तारीकरण के कार्य को देखेगी। 27 फरवरी 2019 तक नया मिल बनकर तैयार हो जाएगा।
मंगलवार को रमाला चीनी मिल क्षेत्र के किसानों की बैठक हुई। इसमें मिल के जीएम एसके चौहान भी मौजूद रहे। किसानों की पांच सदस्य कमेटी का गठन किया। यह कमेटी मिल में चल रहे निर्माण कार्य पर नजर रखेगी। शीघ्र ही मिल के सदस्यों की साधारण सभा होगी। इसमें डिस्टलरी एवं एंथेल बनाने पर भी विचार किया जाएगा। कंपनी को 27 फरवरी तक कार्य पूर्ण करना है। तीन साल तक ही कंपनी मिल की देख रेख करेगी। इसमें समिति की उप सभापति ब्रिजेश रानी के प्रतिनिधि सतेंद्र तुगाना, पूर्व विधायक रतन पाल सिंह, धर्मपाल चेयरमैन, विवेक चौहान, पूर्व चेयरमैन वीरेंद्र पाल, किरत पाल, मास्टर अकरम, मास्टर शकील, मास्टर राजपाल सिंह आदि उपस्थित रहे।
54 गांव के करीब 30 हजार किसान
बागपत। चीनी मिल से 54 गांव के 30 हजार किसान जुड़े हैं। लोन में सबसे बड़ी समस्या किसानों का शेयर सिर्फ सात फीसदी होना है। इस शेयर को 10 फीसदी किए जाने पर विचार चल रहा है। किसानों ने कहा कि वह हर मदद के लिए तैयार है।
40 साल पहले बनाया गया था चीनी मिल
बागपत। सहकारी चीनी मिल रमाला का उद्घाटन वर्ष 1978 में किया। उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री बाबू बनारसी दास, तत्कालीन गृहमंत्री चौधरी चरण सिंह और हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री देवी लाल ने मिल का उद्घाटन किया था।