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परिश्रम और पुरूषार्थ ही जीवन का मूल आधार

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परिश्रम, पुरूषार्थ ही जीवन का मूल आधार
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बागपत। जैन धर्मशाला में संत निरंकारी सत्संग का आयोजन हुआ, जिसमें गुलशन कुमार वर्मा जी ने कहा किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए पुरूषार्थ की बड़ी आवश्यकता होती है।
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साध संगत को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि महापुरूष ने बालक से पूछ लिया कि सफलता का क्या रहस्य है। उसने समझाया कि सफलता का कठोर परिश्रम और सही मार्गदर्शन। आलस्य को वेदों में पाप माना गया है। सतरंग पुराण में कहा गया है कि जो परिश्रम नहीं करते है उन्हें लक्ष्मी की प्राप्ति नहीं होती है। मनुष्य को सदा पुरूषार्थ करते रहना चाहिए। अपने हर प्रकार के कर्तव्यों को भली भांति परिश्रम और पुरूषार्थ के द्वारा पूरा करें। परोपकार के लिए समय निकाले और मोक्ष हेतु पूर्ण सद्गुरु से ब्रह्मज्ञान प्राप्त करके अपने सब भ्रम समाप्त करें और सूखी जीवन गुजारे। मुखी जयपाल सिंह, नेम सिंह, श्रीनिवास, विनोद, बिजेंद्र सिंह, राजकुमार, मुकेश, तेजपाल, गुड्डू, प्रताप, जगमोहन, कृष्णा, चक्षु कुमार, पूनम, मंजू, सरिता, कविता, राखी, मितलेश, शगुन, उज्ज्वल, सूरज, अंकुर, श्रीकांत, अजय मौजूद रहे।
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