बड़ौत (बागपत)।
उम्र 28 भी नहीं हुई, लेकिन दान का महत्व मानों बचपन से जान लिया। बचपन में खिलौने कपड़े तो बड़े होकर रक्तदान। अब तक वे 48 बार रक्तदान कर चुके हैं। कहीं पर भी रक्त की जरूरत पड़ती है तो वे मसीहा बनकर वहां पर पहुंच जाते है। कभी दोस्तों के लिए, तो कभी अजनबियों के लिए। ब्लड की दरकार चाहे रात में पड़े तो या फिर दिन में। सूचना मिलते ही दौड़ पड़ते हैं। उनका कहना है कि कतरा-कतरा खून का जीवन की रस धारा खून अपना देकर कीजिए प्राणों का संचार। इतना ही नहीं रक्तदान करने के लिए वे खुद तो आगे आते हैं। साथ ही वह दूसरों को भी उसके लिए प्रेरित करते हैं।
ऐसे मसीहा का नाम है डॉ. अमित गुप्ता। जो हाल में बिनौली सीएचसी में चिकित्सा अधिकारी के पद पर तैनात हैं। डॉ. अमित गुप्ता पुत्र हरिशंकर गुप्ता दिल्ली के रहने वाला हैं। उन्हें बचपन से ही गरीब परिवार के बच्चों को खिलौने व कपड़े देने का शौक था। एक बार उनके किसी दोस्त का एक्सीडेंट हो गया । एक्सीडेंट के बाद उनके दोस्त को खून की जरूरत थी, लेकिन आसानी से उन्हें खून नहीं मिला । कई बड़े नामचीन अस्पतालों व चिकित्सकों के बाद भी उनके दोस्त को खून नहीं मिला। तब उन्हें रक्तदान करने का महत्व का पता चला । हालांकि बाद में उनके दोस्त को किसी परिचित ने खून देकर उनकी जान बचा ली, लेकिन डॉ. अमित गुप्ता ने 18 साल की उम्र में ही रक्तदान करने का संकल्प ले लिया। इसके बाद न तो उन्होंने खुद तो रक्तदान किया, साथ ही दूसरे डोनर को भी तैयार किया। अब तक डॉ अमित गुप्ता 48 बार रक्तदान कर चुके हैं।
डॉ. अमित गुप्ता ने बताया कि वह व्हाटस एप और फेस बुक के माध्यम से लोगों को जागरूक करते हैं। उनका माना है कि ब्लड कैंप मेें रक्तदान करके रक्त बर्बाद होता है। कैंप की जगह आप किसी जरूरतमंद को समय से खून दे दे, उससे आपको दुआ मिलेगी। उन्होंने बताया कि बड़े भाई अरुण गुप्ता से उन्हें रक्तदान करने की प्रेरणा ली। अरुण गुप्ता भी 30 बार भी रक्तदान कर चुके हैं। डॉ. अमित गुप्ता सशस्त्र सीमा बल कनाडा हिमाचल प्रदेश के ट्रेनिंग सेंटर मेें चिकित्सा अधिकारी के पद पर थे, तभी भी उन्होंने कई जवानों की रक्त देकर जान बचाई। आलम यह है कि उन्हें जहां भी जरूरतमंद लोगों को रक्त की जरूरत की सूचना मिलती है, वे दौड़ पड़ते हैं। देश ही नहीं विदेशों मेें भी उन्होंने वर्ष 2016 में फ्रांस, 2017 में मास्को मेें भी रक्तदान किया । इस संबंध मेें जिला चिकित्सालय के ब्लड केंद्र प्रभारी डॉ. अनुराग वार्ष्णेय ने कहा। रक्तदान करने से आप चार लोगों की जान बचा सकते हैं। रक्तदान से कमजोरी नहीं होती। कहा कि नियमित रूप से रक्तदान करने वाला व्यक्ति स्वस्थ रहता है।