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ख्वाहिश है कि वजू करूं तो लोटे में गंगाजल हो...

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बागपत। वैदिक विश्व दर्शन केंद्र की ओर से कवि सम्मेलन में देश के हालत को कविताओं के माध्यम से प्रस्तुत किया। शनिवार रात वात्सायन पैलेस में कवि सम्मेलन का उद्घाटन नगर चेयरमैन एडवोकेट राजूद्दीन ने मां सरस्वती के चित्र के सम्मुख दीप जलाकर किया। प्रसिद्ध महिला कवि तुषा शर्मा ने ‘वक्त के साथ जो मुश्किल कोई टल जाएगी, इसका मतलब नहीं तकदीर बदल जाएगी’, सुनाकर वाहवाही लूटी।
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मध्यप्रदेश से आईपीएस अधिकारी वर्तमान में एडीजी भोपाल पवन जैन की कविता ‘बंद हो थाने के पट ऐसा कभी होता नहीं, शहर सोए चैन से बस इसलिए सोता नहीं। कर्म पथ पर मिले मुझको मगर कांटे बहुत, आदमी हूं कैसे कहूं मैं कभी रोता नहीं’।
राजस्थान के धोलपुर से आए कवि रामबाबू सिकरवार ने कहा ‘ये स्वाधीनता अब ज्ञानी नहीं है, शहीदी चिताएं सजानी नहीं हैं। करें यदि कोई बेवफाई वतन से, वो समझो असल खानदानी नहीं है’।
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सबरस मुरसानी ने ‘स्वार्थ को जो भी जीते हैं, वो भी क्या जिंदगानी है। जो मातृभूमि पर मिट न सकी वो भी क्या जवानी है’।
ऋचा आर्य ने कहा ‘जिसे सीचा लहूं से वो यूं ही खो नहीं सकती...सुनाकर दाद बटोरी।
चंद्रशेखर मयूर मेरठ ने कहा ‘अब भारत में कभी नहीं रमजान, राम में पंगा हो, ख्वाहिश है के वजू कंरू तो लोटे में गंगाजल हो’।
इस दौरान एसपी जयप्रकाश और एसडीएम विवेक कुमार यादव मौजूद रहे। वैदिक विश्व दर्शन के जिलाध्यक्ष महेश शर्मा सभी का आभार जताया। इसमें राजपाल शर्मा, सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य नरेश शर्मा, व्यापारी नेता अभिमन्यु गुप्ता, सुरेश चंद कौशिक, राधेश्याम शर्मा, नंदलाल डोगरा, गजेंद्र सिंह बली, धर्म सिंह विकल, राजीव ठेकेदार, तनवीर ठेकेदार, रघुवीर चौहान मौजूद रहे।
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