बड़ौत (बागपत)।
जैन अनुयायियों के चल रहे दशलक्षण पर्व के पांचवें दिन उत्तम सत्य धर्म को जैन अनुयायियों ने अंगीकार कर विशेष पूजा अर्चना की और मंदिरों में विधान और भजन संध्या के कार्यक्रम हुए।
दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में अनुमान सागर महाराज के सानिध्य में तेरहदीप महामंडल विधान में जैन श्रद्धालुओं ने भगवान चंद्रप्रभु का अभिषेक विधि रूप से किया। इसके बाद दशलक्षण पर्व की पूजा की । पंडित अमरचंद जैन के निर्देशन में विधान में पश्चिम विधेय संबंधी षोडश रुपाचल, दक्षिण दिशा, भरत क्षेत्र संबंधी जिन मंदिर, विजय मेरू के उत्तर दिशा संबंधी अहरावत क्षेत्र, विजय मेरू के उत्तर दक्षिण षटकुलाचल की धातु की दीप मध्यम पश्चिम दिशा, अचल मेरू आदि आठ प्रकार की पूजा की । बीच-बीच में इंद्र और इंद्राणियों ने भक्ति भाव पूर्वक नृत्य कर भावना व्यक्त की। इसके अलावा जैन छोटा मंदिर, दिगंबर जैन अतिथि भवन में श्रद्धालुओं ने विशेष पूजा-अर्चना भक्ति भाव से की । सायंकाल बड़ा जैन मंदिर, छोटा जैन मंदिर और अतिथि भवन में भगवान की आरती उतारी। इसके बाद दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में धार्मिक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया और दिगंबर जैन अतिथि भवन में धार्मिक प्रस्तुती की। इसमें प्रवीण जैन, अतुल जैन, शील चंद, सतीश जैन, सुरेंद्र, प्रदीप, दिनेश जैन, विपुल जैन, श्रवण जैन, सुख माल जैन, संदीप जैन आदि रहे।
सत्य मानव जीवन का श्रृंगार - अनुमान सागर महाराज
बड़ौत। आचार्य अनुमान सागर महाराज ने जैन अतिथि भवन में धर्मसभा में कहा सत्य मानव जीवन का श्रृंगार है। आत्मा की सफाई होने के उपरांत आत्मा के दिव्य आसन में सत्य का देवता विराजमान हो जाता है। धर्म अनुभूति को सत्य करता है। शब्द को नहीं सत्य को शब्दों की बोतलों में कैद नहीं किया जा सकता। शब्दों के माध्यम से जो भी कहा जाता है। पूर्ण सत्य नहीं होता, क्योंकि शब्द जड़ है, मृत है, सीमित है।
उत्तम सत्य धर्म की पूजा की
बड़ौत। अजित नाथ दिगंबर जैन प्राचीन मंदिर कमेटी के तत्वावधान में आचार्य सुंदर सागर महाराज के सानिध्य में विहर्ष सभागार सत्यवती जैन धर्मशाला में उत्तम सत्य धर्म की पूजा की । ब्रह्मचारिणी रीता दीदी के निर्देशन में जैन इंद्र और इंद्राणियों ने जिनेंद्र भगवान की अर्चना की तथा भक्ति भाव से नृत्य किए। शांतिधारा का सौभाग्य आर के जैन परिवार को प्राप्त हुआ। नित्य नियम की पूजा में देवशास्त्र गुरू पूजन, सोलहकरण पूजन, पंच मेरू पूजन, दशलक्षण पूजन और नंदीश्वर दीप की पूजा की। आचार्य सुंदर सागर महाराज में पूजा करने की विधि को पूजन शिविर के मध्य विस्तार से समझाया। पूजन में प्रमोद जैन, वरदान जैन, जयप्रकाश जैन, मदन लाल जैन, वकील चंद जैन, अरुण जैन, अशोक जैन, शशि जैन आदि रहे। रात्रि में गुरू भक्ति एवं नृत्य प्रतियोगिताओं के आयोजन किए। इसमें बच्चों ने सुंदर नृत्य प्रस्तुत किए। विजेताओं को राकेश जैन ने पुरस्कृत किया।
अश्लीलता की ओर जा रहा आज का मनुष्य - अरुण मुनि
बड़ौत। जैन संत अरुण मुनि ने जैन स्थानक शहर में धर्मसभा में कहा त्याग की स्थिति तभी बनती है। जब राग का अंत हो जाता है। कोख ऐसी चीज है। जिससे मनुष्य जीवन जीव और जंतु आदि सभी जन्म लेते हैं। किसी प्रकार से राग से सभी पापों का जन्म होता है। वीतराग भगवान कहते हैं जिन्होंने राग को दूर कर दिया वह ही परमात्मा को पा सकता है। हम मकड़ी रूपी जाल में फंसे है। जितना हम राग से छूटने का प्रयास करते हैं, उतने ही उसमें फंसते जाते हैं। आज व्यक्ति पराई नारी से राग करता है। अश्लीलता की ओर चला जाता है। उन्होंने कहा जो व्यक्ति पूर्ण रूप से तपस्या करता है, मगर राग को नहीं छोड़ पाता। उसका सब कुछ करना व्यर्थ होता है। जब हम विषयों से दूर रहेंगें तो राग अपने ही आप कम होेगा। धर्मसभा में नवनीत, आशीष, वरदान, कालू जैन, शशांक, शैलबाला, इंद्राणी, कमलेश आदि रहे।