अब डाक कांवड़ियों का उमड़ा सैलाब
बड़ौत (बागपत)। सड़कों पर पैदल कांवड़ियों की कतार कम होने लगी है और डाक कांवड़ियों का सैलाब उमड़ा। शिवभक्त गंगाजल लेकर सड़क पर दौड़ते दिखे। इनके लिए दूरी और समय तय है। सड़कों पर बृहस्पतिवार को पैदल कांवडिय़ों की संख्या कम रही, जबकि डाक कांवडिय़ों का सैलाब उमड़ पड़ा। जिले के भड़ल चेकपोस्ट से लेकर दाहा, बड़ौत और गौरीपुर मोड तक डाक कांवड़ दौड़ीं। इसके अलावा दाहा से बरनावा और पुरा महादेव तक डाक कांवड़िए दौड़ते नजर आए। अपने डाक कांवड़ वाहन के आगे या पीछे गंगाजल हाथ मेें लेकर कांवडिए एथलीट की तरह दौड़ लगाते नजर आए।
रिले दौड़ की तर्ज पर गंगाजल की बोतल एक-दूसरे के हाथ में थमाते हुए यह कांवड़िए दौड़ते हैं। इन नजारों को देखने के लिए सड़कों के किनारे आसपास के लोगों की भी भारी भीड़ जुट रही है। शुक्रवार को भी इन कांवडिय़ों के बड़ी संख्या में यहां पहुंचने की उम्मीद है। बाइक पर जल लाने वाले कांवड़िए बृहस्पतिवार को हरिद्वार के लिए रवाना ्हो गए।
उधर, पंडित कुंदन और आचार्य रोहताश शर्मा ने बताया कि ब्रहाज्योति जब प्रकृति से साक्षात्कार करती है तो यह सारी प्रकृति जीवंत हो उठती है। अत: यह निराकार ब्रह्मा का भी अभिषेक है एवं साकार रूप में हमें इन्हें शिव मानकर अभिषेक एवं पूजन करते है। अभिषेक शब्द का शाब्दिक अर्थ है स्नान करना अथवा कराना। रूद्राभिषेक का अर्थ है भगवान रूद्र का अभिषेक अर्थात शिवलिंग पर रूद्र के मंत्रों के द्वारा अभिषेक। यह पवित्र स्नान रूद्ररूप शिव को कराया जाता है। उन्होंने बताया कि शिव जी को प्रसन्न करने का सबसे श्रेष्ठ तरीका है रूद्राभिषेक करना है।