फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बरनावा से चुने गए थे विधायक, राजनीति में फिर नहीं बनी जमीन

विज्ञापन
विज्ञापन
बागपत। भाजपा नेता एवं बरनावा के पूर्व विधायक सतेंद्र सोलंकी एक बार विधानसभा जरूर पहुंचे, लेकिन इसके बाद वह सियासी जमीन नहीं बना सके। रालोद में लंबे समय तक रहे, बसपा के टिकट पर मेरठ कैंट से चुनाव लड़ा और पहले चरण के मतदान से एन पहले भाजपा में शामिल हो गए थे। उनके भाई हरेंद्र सिंह बिनौली ब्लॉक के प्रमुख और गन्ना समिति के चेयरमैन के पद पर भी रह चुके हैं।
विज्ञापन

बागपत के बिनौली ब्लॉक के गांव जिवाना गुलियान के रहने वाले सतेंद्र सोलंकी ने सियासत के मैदान में भी पहचान बनानी शुरू की थी। सोलंकी के ससुर पूर्व विधायक डॉ महक सिंह की गिनती रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह के करीबियों में होती है। इसके अलावा सोलंकी के साले अजय कुमार भी छपरौली से विधायक रहे हैं। रालोद अध्यक्ष से इन्हीं नजदीकियों के चलते सतेंद्र सोलंकी को साल 2007 में बरनावा सीट से रालोद ने टिकट दिया था। यहां से चुनाव जीतकर वह विधानसभा पहुंचे। नए परिसीमन में हुए साल 2012 के चुनाव में बरनावा सीट खत्म हो गई और बड़ौत नई सीट बनीं। लेकिन रालोद ने दोबारा से सोलंकी को टिकट नहीं दिया। टिकट नहीं दिए जाने के बाद लंबे समय तक आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी चला था। रालोद में राजनीतिक ख्वाहिश पूरी नहीं होती देख सोलंकी ने साल 2017 के चुनाव में बसपा ज्वाइन कर ली। बसपा ने उन्हें मेरठ कैंट से टिकट दिया, लेकिन वह हार गए, जिस कारण सियासत की नई जमीन की तलाश उनकी अधूरी ही रह गई। सोलंकी ने साल 2019 के लोकसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान से पहले नया पैंतरा भी चला। लखनऊ में भाजपा अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडेय के सामने वह भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा में शामिल होने के पीछे, उनकी साल 2022 का चुनाव लड़ने की महत्वाकांक्षा भी थी। लेकिन दोष सिद्ध हो जाने के बाद अब सियासी जमीन बनाने का सपना अधूरा रह गया है। उनके भाई हरेंद्र सिंह बिनौली ब्लॉक के प्रमुख रहे हैं। इसके अलावा वह गन्ना समिति में भी कई पदों पर रह चुके हैं।

छात्र राजनीति से शुरूआत
बागपत। सतेंद्र सोलंकी के राजनीतिक कॅरियर की शुरूआत छात्र राजनीति से हुई थी। सिंभावली के किसान डिग्री कॉलेज से पढ़ाई की और यहीं से छात्र राजनीति की शुरूआत की।
विज्ञापन

मां भी चुनी गई थी ब्लॉक प्रमुख
बागपत। सतेंद्र सोलंकी मां भी बिनौली ब्लॉक की प्रमुख रही। इसके अलावा उनके भाई हरेंद्र सिंह भी प्रमुख रह चुके हैं।
भाजपा में शामिल, लेकिन वेबसाइट पर बसपाई
बागपत। सतेंद्र सोलंकी भले ही भाजपा में शामिल हो गए हैं, लेकिन विधानसभा चुनाव साल 2017 के समय बनाई गई उनकी वेबसाइट अभी भी पूरी तरह बसपा के रंग में रंगी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें