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भक्तांबर विधान में ज्ञान महोत्सव मनाया

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बागपत। सरूरपुर कलां गांव में नेमिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में भक्तांबर महाअर्चना के 35वें दिन भक्ति पूर्वक अभिषेक और शांतिधारा की गई। सर्व रिद्धि सिद्धी प्रदाता भक्तांबर के 48 अर्घ्य चढ़ाए गए। अभिनंदन नाथ भगवान के केवल ज्ञान महोत्सव पर पूजन की गई।
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धर्मसभा में आचार्य श्री वसुनंदी महाराज के प्रवचन को नमन जैन ने सुनाया। बताया कि तीन बातें भक्त के जीवन में जरूर होनी चाहिए। इसमें हैं प्रतीक्षा, परीक्षा और समीक्षा। भक्ति के मार्ग में प्रतीक्षा बहुत आवश्यक है। प्रभु जरूर आयेंगे, कृपा करेंगे, ऐसा विश्वास रखते हुए प्रतीक्षा करें। बहुत बड़ी प्रतीक्षा के बाद शबरी की कुटिया में प्रभु आए थे। परीक्षा यह है कि इस संसार में सब अपने कारणों से जी रहे हैं। किसी के भी महत्वाकांक्षा के मार्ग पर बाधा बनोंगे, वही तुम्हारा अपना, पराया हो जाएगा। संसार का तो प्रेम भी छलावा है। संसार को जितना जल्दी समझ लो तो अच्छा है ताकि प्रभु के मार्ग पर तुम जल्दी आगे बढ़ो। अपनी समीक्षा रोज करते रहो, आत्मचिन्तन करो। जीवन उत्सव कैसे बने। प्रत्येक क्षण उल्लासमय कैसे बने। जीवन संगीत कैसे बने, यह चिंतन जरूर करना। विधान अनीता जैन ने कराया। लक्ष्य, वैशाली, पूर्ती, मेघा, प्रज्ञा, सिम्मी, शालू, गीता, संतोष, उषा जैन मौजूद रहे।
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