अमीनगर सराय में कलश यात्रा में भाग लेते श्रद्घालु
- फोटो : BAGHPAT
अमीनगर सराय (बागपत)। चैत्र नवरात्र के पहले दिन 100 कुंडीय आर्युत महाचंडी महायज्ञ का शुभारंभ किया गया। 1500 महिलाओं सहित सैकड़ों संत और श्रद्धालुओं ने भव्य कलश यात्रा निकाली। लोगों ने फूलों की वर्षा कर कलश यात्रा का स्वागत किया गया। कलश यात्रा के उपरांत विधिविधान से महायज्ञ का शुभारंभ किया गया। यात्रा में छात्राएं झंडे लेकर नारे लगाते हुए चल रही थी।
श्री त्रयंबकेश्वर महाराज और डॉ. गुण प्रकाश चैतन्य महाराज के निर्देशन में महाचंडी महायज्ञ के पहले दिन मनसा देवी मंदिर प्रांगण से कलश यात्रा प्रारंभ हुई। कलश यात्रा में 1500 महिलाओं सहित सैकड़ों संत व आचार्यों ने हिस्सा लिया। आचार्यों ने ऊंटों व घोड़ों पर सवार होकर कलश यात्रा का पथ प्रदर्शन किया। सरस्वती शिशु मंदिर की झांकी आकर्षण का केंद्र रही। जगह-जगह लोगों ने फूल बरसाकर यात्रा का स्वागत किया। कलश यात्रा कस्बे के मुख्य बाजार से होते हुए यज्ञशाला तक निकाली गई। इसके बाद महिलाओं ने यज्ञशाला के चारों ओर अपने कलश स्थापित किए। मुख्य आचार्य दिवाकर ने यज्ञ में शामिल होने वाले सभी यजमानों का प्रायश्चित संस्कार कराया। यज्ञ में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए संत, आचार्य और श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
वालंटियर बनीं छात्राएं
आचार्य जयसागर कन्या इंटर कॉलेज की छात्राओं ने कलश यात्रा में वालंटियर बनीं। मुस्लिम छात्रा सना, राबिया, तब्बसुम, सोफिया, तरन्नुम, तसलीम, सानिया ने भी अपनी जिम्मेदारी निभाई।
अरणी मंथन से अग्निदेव को प्रसन्न कर शुरू किया यज्ञ
यज्ञ का शुभारंभ अरणी मंथन से किया गया। डॉ गुनप्रकाश चैतन्य महाराज ने कहा कि यज्ञ में अग्नि देव का बड़ा महत्व होता है। माचिस, ज्योति या अन्य किसी साधन से हवन कुंड में अग्नि प्रज्वलित नहीं की जाती, बल्कि वैदिक पद्धति द्वारा अरणी मंथन किया जाता है। जब अग्निदेव प्रसन्न होते है तब चिंगारी के माध्यम से उत्पन्न हुई अग्नि से ही हवन कुंड में यज्ञ का प्रारंभ किया जाता है। यह वैदिक विधि सनातनियों की धरोहर है।
अमीनगर सराय में कलश यात्रा में भाग लेते श्रद्घालु- फोटो : BAGHPAT