आजमगढ़। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की हाईस्कूल (कक्षा 10) की परीक्षा को लेकर बनी असमंजस की स्थिति आखिरकार शनिवार को समाप्त हो गई। उप मुख्यमंत्री डा. दिनेश शर्मा ने कक्षा-10वीं की परीक्षा रद्द करते हुए कक्षा 11वीं में प्रमोट किया जाएगा। वहीं यूपी बोर्ड 12वीं की परीक्षाएं जुलाई के दूसरे सप्ताह में आयोजित कराने की बात कही जा रही है। सरकार के इस फैसले को लेकर छात्रों, शिक्षक व अभिभावाकों ने समय के साथ सही फैसला ठहराया है।
जिले में यूपी बोर्ड के कुल एक लाख 95 हजार 896 छात्र पंजीकृत हैं। इनमें हाईस्कूल के 104137 व इंटरमीडिएट के 91759 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। पिछले कई दिनों से यूपी बोर्ड 10वीं परीक्षाओं को रद्द कर रिजल्ट तैयार करने की तैयारियों में जुटा है। यूपी बोर्ड 10वीं की परीक्षा इतिहास में पहली बार रद्द की गई हैं। इससे पहले सीबीएसई व आईसीएससीई समेत अन्य बोर्डों ने भी 10वीं की परीक्षा रद्द करने का ऐलान किया है। अब यूपी बोर्ड ने भी परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया है। वहीं इंटरमीडिएट की परीक्षा जुलाई के दूसरे सप्ताह में आयोजित कराने की बात कही जा रही है। अगले सप्ताह तक इसपर भी फैसला आने की उम्मीद जताई जा रही है।
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उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के निर्देश पर सभी स्कूलों के प्रधानाचार्यों से यूपी बोर्ड 10वीं के छात्रों के अर्धवार्षिक और प्री बोर्ड परीक्षा के नंबर परिषद की आधिकारिक वेबसाइट में अपलोड कराए गए थे। न्यूज चैनल के माध्यम से सूचना मिल रही है कि हाईस्कूल की परीक्षाएं रद्द कर दी गई है। हालांकि अभी हमारे पास इसका कोई आदेश नहीं आया है।
डा. वीके शर्मा, डीआईओएस, आजमगढ़।
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कोरोना के कारण परीक्षाएं टाल दी गईं हैं। अब यूपी बोर्ड की हाईस्कूल के छात्रों की परीक्षा टाल दी गई है। शासन ने सही समय पर सही फैसला लिया है। सराहनीय कदम है।
प्रेमनारायण, शिक्षक।
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कोरोना के कारण स्कूल कालेज बंद थे। बच्चे किसी तरह से ऑनलाइन पढ़ाई किए। जब परीक्षा की बारी आई तो चुनाव करा दिया गया और परीक्षाएं टाल दी गई। ऐसे में परीक्षा की तैयारी स्थिर हो गई। हालांकि बोर्ड ने सही कोरोना संक्रमण को देखते हुए सही फैसला लिया है।
बृजेश मौर्य, शिक्षक।
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परीक्षा की तैयारी कर रहे थे तब तो पंचायत चुनाव कराया गया। परीक्षा को लेकर जारी आदेश ने हमारी तैयारियों पर पानी फेर दिया है। हम क्या करें कुछ समझ में नहीं आ रहा है।
पल्लवी यादव, छात्रा।
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परीक्षा को लेकर की गई तैयारियां धरी की धरी रह गई। अब परीक्षा नहीं होगी तो सबका रिजल्ट सामान्य ही होगा। ऐसे में न कोई आगे होगा और न ही कोई पीछे। इसमें पढ़ने वालों का सबसे अधिक नुकसान हुआ है। कारण कि बिना पढ़े ही कमजोर छात्र उसके बराबर रहेगा।
प्रिंस राय, छात्रा।
- विकास विश्वकर्मा