आजमगढ़। जिले का मेहता पार्क जो वर्तमान में अंबेडकर पार्क हो गया है कई महत्वपूर्ण चुनावों का साक्षी रहा है। कई दिग्गज नेताओं के चुनाव की दिशा यहां से तय हुई है। इस पार्क में छात्रों के विरोध के चलते जनता पार्टी के रामबचन यादव चुनाव हार गए तो 1985 के चुनाव में रामनरेश यादव भरे मंच से रोए और जनता में संदेश गया कि अब अच्छे लोग नहीं करा सकेंगे काउंटिंग, जिसके परिणाम दो बाहुबली नेताओं का उदय हुआ।
किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष इम्तेयाज बेग ने बताया कि बात 1985 की है। जब प्रधानमंत्री रही इंदिरा गांधी की हत्या के बाद लोकसभा के चुनाव हो रहे थे। कांग्रेस पार्टी से संतोष सिंह चुनाव मैदान में थे। उनके सामने रामनरेश यादव चुनाव मैदान में थे। मतदान होने के बाद जब मतगणना हुई तो सरायमीर विधानसभा सीट की मतगणना चल रही थी। तभी विवाद हुआ और पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। इसके बाद संतोष सिंह को विजेता घोषित कर दिया गया। इसके बाद मेहता पार्क में जनसभा हुई। जिसमें रामनरेश यादव जब बोलने के लिए खड़े हुए तो खुद को हराने का आरोप लगाते हुए फफक-फफक कर रो दिए। जिससे जनता में यह संदेश गया कि अब कोई अच्छा व्यक्ति काउंटिंग भी नहीं करा पाएगा। जिसका परिणाम हुआ कि 1985 में ही विधानसभा के चुनाव में जनपद की राजनीति में दो बाहुबलियों की इंट्री हुई। जिसमें रमाकांत यादव और दुर्गा प्रसाद यादव शामिल थे। जनपद में आज भी राजनीति में इन दोनों का दबदबा देखने को मिलता है। दुर्गा प्रसाद यादव आजमगढ़ सदर सीट से आठ बार विधायक चुने जा चुके हैं। जबकि रमाकांत यादव विधायक के साथ ही चार बार सांसद चुने जा चुके हैं।