लाटघाट। साहित्यकार विभूति नारायण राय के 75वें जन्मदिन पर मंगलवार की शाम जोकहरा गांव स्थित श्रीरामानंद सरस्वती पुस्तकालय में ‘75 के हुए विभूति’ विषयक समारोह हुआ।
समारोह की शुरुआत बैजनाथ यादव के गीत से हुई। डॉ. जयप्रकाश धूमकेतु ने स्वागत वक्तव्य दिया। साहित्यकारों और पाठकों ने विभूति नारायण राय का माल्यार्पण, बुके और शाल भेंट कर हार्दिक अभिनंदन किया। मुख्य अतिथि महाराज सुहेलदेव विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने कहा कि विभूति का साहित्य हमारे समय, समाज और संस्कृति को पूरी बेबाकी से निरुपित करता है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र में पुस्तकालय की स्थापना कर नई पीढ़ी को जागरूक बनाने की दिशा में अपूर्व योगदान दिया है। वे जिले की समृद्ध साहित्यिक विरासत के संवाहक हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता हरिश्चंद्र पीजी कॉलेज, वाराणसी के पूर्व प्राचार्य डॉ. गया सिंह ने की। उन्होंने विभूति के समग्र लेखन पर प्रकाश डाला। विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ आलोचक और दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. अनिल राय ने कहा कि उन्होंने चुनौतियों का सामना करते हुए वैचारिक प्रतिबद्धता के साथ जीवन जिया है। गांधी स्मारक त्रिवेणी पीजी कॉलेज, बरदह के प्रो. वीके राय ने उनके साहसपूर्ण प्रशासनिक योगदान को याद किया। सरफराज अहमद ने विभूति नारायण राय से जुड़े निजी संस्मरण साझा किए, जबकि इलाहाबाद से आए आनंद मालवीय ने उनके युवाकाल के अनुभवों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में सुरेंद्र राही, डॉ. संजय श्रीवास्तव, डॉ. संजय यादव, डॉ. अशोक कुमार पाण्डेय, डॉ. अनुपम यादव रहे।