जलस्तर बढ़ने से रास्ते पर चढ़े पानी के कारण बंधे से चढ़ कर जाते लोग। संवाद
- फोटो : samvad
लाटघाट। तीन बैराजों से तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से घाघरा का जलस्तर लाल निशान से पा चला गया है। इससे जहां पगडंडियां डूब गई हैं, वहीं गांव घिरे हुए हैं। घाघरा के बढ़ता जलस्तर से देवारा क्षेत्र के ग्रामीणों और किसानों में चिंता है।
बाढ़ के पानी खेतों में फैलने लगा है, गांवों की पगडंडियां डूबने लगी हैं। एेसे ही जलस्तर बढ़ता रहा तो एक दो दिन में गांवों में पानी भरने लगेगा।
बृहस्पतिवार की शाम 4 बजे बदरहुआं नाले पर जलस्तर 71.55 मीटर दर्ज किया गया था, जो शुक्रवार को 25 सेमी बढ़कर 71.80 मीटर पर पहुंच गया। यह खतरे के निशान 71.68 मीटर को पार कर गया है।
वहीं डिघिया नाले पर भी जलस्तर 70.90 मीटर से बढ़कर 71.10 मीटर पहुंच गया है। यहां पर खतरे के निशान का स्तर 70.40 मीटर है। कूढ़न पट्टी, शाहडीह और मानिकपुर जैसे गांवों में खेतों में बाढ़ का पानी घुसने लगा है। रमेश यादव ने बताया कि खेतों में पानी भरने लगा है। सबसे बड़ी समस्या यातायात और जीवन-जरूरतों को लेकर है।
बांका, बूढ़नपट्टी, शाहडीह और मानिकपुर के संपर्क मार्ग पूरी तरह से जलमग्न हो चुके हैं। इससे 5000 की आबादी को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों को कई किलोमीटर घूमकर दूसरे गांवों से होकर आना-जाना पड़ रहा है। कई जगहों पर नाव चलाने की जरूरत है।