लाटघाट। सगड़ी तहसील के उत्तरी क्षेत्र से होकर बहने वाली सरयू नदी का रौद्र रूप पिछले 40 साल से लगातार तबाही मचा रहा है। नदी की तेज कटान अब तक लगभग 12 से ज्यादा गांवों और उनके पुरवों का अस्तित्व समाप्त कर चुकी है। हजारों एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि नदी की धारा में समा गई है, जबकि सैकड़ों परिवारों को अपना पुश्तैनी घर-बार छोड़कर दूसरे स्थानों पर नई बस्तियां बसाने के लिए मजबूर होना पड़ा। कटान का यह सिलसिला आज भी जारी है और तटवर्ती गांवों के लोग हर साल बाढ़ और कटान के भय के बीच जीवन बिताने को विवश हैं।
सगड़ी क्षेत्र में साल 1980 के दशक से कटान ने विकराल रूप धारण किया। हालांकि साल 1935-40 के दौरान भी सरयू ने व्यापक तबाही मचाई थी। चक्की गांव निवासी पलटन यादव बताते हैं कि उस समय पूरा गांव करीब चार किलोमीटर दूर जाकर दोबारा बसाया गया था, लेकिन बाद में वहां भी नदी का कटाव शुरू हो गया। अचलनगर, गरीब दुबे, भिक्षुक दास और अचल सिंह के पुरवों की सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि भी विकराल धारा में समा गई। साल 1989-90 में हैदराबाद गांव की लगभग 100 घरों वाली मूल बस्ती कटान की भेंट चढ़ गई। ग्रामीणों को करीब दो किलोमीटर दूर नया गांव बसाना पड़ा। गांव के एकादशी पटेल, रामप्यारे, रामजनक और महेंद्र बताते हैं कि कटान इतनी तेज थी कि लोगों को अपना सामान तक समेटने का समय नहीं मिला। इसके अगले वर्ष 1990-91 में रोशनगंज गांव भी नदी में समा गया, जहां करीब 250 परिवार विस्थापित होकर पांच किलोमीटर दूर बसने को मजबूर हुए।
देवारा खास राजा के कई पुरवें भी समाए
देवारा खास राजा के कई मजरे भी पिछले सालों में नदी में विलीन हो चुके हैं। साल 2013 से 2016 के बीच रमई का पुरवा, पतिराज का पुरवा, मुशई का पुरवा, भीमली का पुरवा, मुरली का पुरवा, त्रिलोकी का पुरवा, झगरहवा और बगहवा सहित कई बस्तियां घाघरा में समा गईं। वहीं, साल 2004-05 में हाजीपुर, धुसवा और ठिकहिया गांव भी कटान से प्रभावित हुए, जहां दर्जनों परिवारों को बांध के दक्षिण नए स्थान पर बसना पड़ा।
नहीं रुकी कटान तो इतिहास बन जाएगा सहबदिया
वर्तमान समय में भी देवारा खास राजा, सहबदिया और परसिया गांवों के सामने घाघरा की कटान लगातार जारी है। ग्रामीणों का कहना है कि हर मानसून में घर, खेत और भविष्य खोने का डर बना रहता है। उनका आरोप है कि स्थायी कटानरोधी उपायों के अभाव में हर वर्ष तबाही दोहराई जाती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से प्रभावी तट सुरक्षा कार्य, पिचिंग और कटानरोधी परियोजनाओं को शीघ्र लागू करने की मांग की है, ताकि आने वाले समय में और गांव नदी में समाने से बच सके।
घाघरा का जलस्तर लगातार तीसरे दिन घटा, तटवर्ती गांवों को मिली राहत
देवारा क्षेत्र में घाघरा नदी का जलस्तर लगातार तीसरे दिन घटने से तटवर्ती गांवों के लोगों ने राहत की सांस ली है। बदरहुआ नाले पर बृहस्पतिवार शाम चार बजे जलस्तर 70.70 मीटर दर्ज किया गया था, जो शुक्रवार को 25 सेंटीमीटर घटकर 70.45 मीटर पर पहुंच गया। वहीं डिघिया नाले पर जलस्तर 69.94 मीटर से 23 सेंटीमीटर घटकर 69.71 मीटर दर्ज किया गया। डिघिया नाले का खतरा बिंदु 70.40 मीटर और बदरहुआ नाले का खतरा बिंदु 71.68 मीटर है। प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।