सूत्रधार संस्थान की ओर से आयोजित आरंगम-2014 की मंगलवार की शाम प्रतिबिंब नाटक केेे नाम रही।
इसमें कलाकारों ने संपूर्णता के साथ जीवन की पूर्णता को पाने की सीख दी। दिल्ली से आए कलाकारों ने पुरुलिया छाऊ नृत्य की प्रस्तुति से लोगों का खूब मनोरंजन किया।
नाटक में यह दिखाया गया कि एक लड़का है जिसका दर्पण में प्रतिबिंब गायब है। इससे उसके मन में यह सवाल उठता है कि प्र्रतिबिंब क्या है? वह सोचता है कि उसका अपना शरीर जिससे दूसरे उसे पहचान पाते हैं, जीवन की आपाधापी में खो चुकी है।
लड़के के व्यक्तिगत दायरे के कुछ लोग उसकी अपनी मालकिन, आफिस में काम करने वाली लड़की, रटे रटाए सिद्धांतों के बल पर समाज के परिवर्तन की चाह रखने वाला तथाकथित एक लीडर अपने दृष्टिकोण और दर्पण को सामने लातेे हैं।
नाटक के नायक की आत्महत्या एक प्रश्न चिह्न छोड़ती है कि क्या पलायन और संवेदनहीनता समाधान या जीवन की क्रूरता से आत्म संघर्ष करते हुए सरलता और संपूर्णता के साथ स्वयं को प्राप्त करना जीवन की पूर्णता है।
नाटक में सोमेंद्र चौहान, कविता ओझा, आरव आर्यवंशी और निशा वर्मा ने अभिनय किया। मंगलवार शाम कार्यक्रम की शुरुआत बाल कलाकारों द्वारा बाल श्रम पर आधारित कार्यक्र्रम से हुई।
इसके बाद तपस्या ग्रुप द्वारा शास्त्रीय नृत्य, अमित ओझा द्वारा शास्त्रीय संगीत व अंकित सिंह ‘सनी‘ द्वारा लोकगीत के साथ लोकनृत्य आदि की प्रस्तुति हुई।
कार्यकरम की अगली कड़ी में संगीत नाटक एकेडमी नई दिल्ली के सहयोग से राजेश साई, दिल्ली द्वारा ‘‘पुरोलिया छाऊ’’ नृत्य की प्रस्तुति हुई।
इसके कलाकार अंकित पहाड़िया, अमित हलदार, सुंदर कुमार, गोविंद होडियार ने मनमोहक प्रस्तुति से दर्शकों को अभिभूत कर दिया। कार्यक्रम प्रभारी और व्यवस्थापक डा. अलका सिंह ने कलाकारों को प्रमाण प्रत्र व स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
इस मौक पर डा. कन्हैया सिंह, डा. कुबेरनाथ मिश्र, डा. अशेाक श्रीवास्तव, दीनानाथ लाल श्रीवास्तव, पं. अमरनाथ तिवारी, रामप्रकाश शुक्ल, डा. शशिभूषण, जगदीश प्रसाद बरनवाल, डा. द्विजराम यादव आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम संयोजक ममता पंडित और डा. स्वाती ने सभी का आभार जताया।