ठंड विगत कई दशकों का रिकार्ड तोड़ रही है। ऐसे में सड़क किनारे जीवनयापन करनेवाले लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। प्रशासन और पालिका के अधिकारी नगर में अलाव जलवाने के दावे तो खूब कर रहे हैं।
पर कुछ एक प्रमुख स्थानों पर छोड़ कर बाकी जगहों के अलाव कागजों में ही जल रहे हैं।
पालिका प्रशासन के अनुसार नगर क्षेत्र में 28 स्थानों पर अलाव जलवाने की व्यवस्था की गई है।
मंगलवार को अमर उजाला ने कुछ मुहल्लों का दौरा कर लोगों से बातचीत की तो हकीकत सामने आ गई। नगर के रिक्शा स्टैंड, सिविल लाइन, नरौली, ब्रह्मस्थान, रोडवेज, महिला अस्पताल, सदर अस्पताल, कोतवाली, शारदा
चौराहा, हरबंशपुर, बवाली मोड़, पहलवान तिराहा आदि स्थानों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश जगहों पर अलाव का पता नहीं है। कुछ स्थान ऐसे भी मिले जहां एक दो दिन ही अलाव जलवाए गए। आज वहां राख के सिवा कुछ नहीं है। सर्र्फुद्दीनपुर केे मुहल्ले के सुभाष यादव ने बताया कि उनके मुहल्ले में अलाव कभी जला ही नहीं। सड़क किनारे रहनेवाले रिक्शेवाले कूड़ा और प्लास्टिक का कचरा जला कर देह सेकते हैं।
सिधारी तिराहा निवासी धर्मेंद्र गुप्ता ने बताया कि उनके मुहल्ले में चार दिन पहले अलाव जलवाया गया था जिसकी आग अब ठंडी पड़ चुकी है। पालिका की ओर से आगे जलाने के लिए लकड़ी नहीं भेजी गई है। वहीं ठाकुर राजबहादुर सिंह स्मारक महाविद्यालय, महादेवी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सिधारी के प्राचार्य ने बताया कि उनके यहां कभी भी अलाव जला नहीं है।
जबकि नगरपालिका द्वारा इन स्थानों का चयन अलाव जलाने के लिए किया गया था। इसके अलावा डीएवी इंटर कालेज रैदोपुर, राजकीय बालिका इंटर कालेज, सर्फुद्दीनपुर, सिधारी तिराहा, ठाकुर राजबहादुर सिंह महाविद्यालय, महादेवी माध्यमिक विद्यालय, चिल्ड्रेन स्कूल, दुर्गाजी महाविद्यालय चंडेश्वर, शिब्ली इंटर कालेज, शिब्ली महाविद्यालय आदि स्थानों पर अलाव न जलने की शिकायतें मिली हैं।
इस बारे में नगर पालिका के कर्मचारी झिनकू ने बताया कि बहुत से स्थानों पर लोगों ने जगह परिवर्तन करा दिया है इससे निर्धारित स्थान पर अलाव जलता नहीं दिखाई दे रहा है। वैसे हम लोग पूरी तत्परता से अलाव जलवा रहे हैं।