सगड़ी। अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध की तपीश ने कोयले के दाम में आग लगा दी है। तीन दिन में प्रति टन 1000 रुपये का इजाफा हुआ है।
विगत तीन दिनों में कोयले के दाम 10 हजार से 11 हजार रुपये पहुंच गए हैं। इससे 506 भट्ठों पर ईंट के निर्माण की लागत बढ़ गई है।
अगली खेप में भट्ठा संचालक इसके दाम और बढ़ने का अनुमान लगा रहे हैं। इसका असर ईंटों की आपूर्ति पर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। जिले में 506 भट्ठों पर ईंट पकाने के लिए फसल अवशेष, लकड़ी के साथ ही कोयले को इस्तेमाल होता है। कोयला व्यापारियों ने बताया कि अमेरिकी और इंडोनिशया से समुद्र के रास्ते बड़े जहाजों में एक साथ अधिक मात्रा में कोयला आता है। ऐसे में यूपी, झारखंड या ओडिशा से रेल के माध्यम से कोयला मंगवाने की तुलना में गुजरात से कोयला मंगाया जाता है, जो अच्छा होता है और दाम भी कम होते हैं।
इस कोयले की कीमत तीन दिन पहले तक 10 हजार रुपये टन थी, जो अब बढ़कर 11 हजार रुपये टन हो गई है। भट्ठा मालिकों ने बताया कि एक भट्ठे पर मार्च से जुलाई तक में 500 टन तक कोयले की खपत होती है। भारत में खासकर सोनभद्र में कोयले के भंडार हैं, लेकिन वहां का कोयला अधिक राख वाला और कम गुणवत्ता का होता है।
यदि कोयले की कीमतों में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही तो एक भट्ठे पर लाखों रुपये तक अतिरिक्त खर्च बढ़ सकता है।
अमेरिका और इंडोनेशिया से आने वाला कोयला ज्यादा कैलोरीफिक वैल्यू वाला होता है, इसलिए भट्ठा संचालक आयातित कोयले को प्राथमिकता देते हैं।
राजेंद्र यादव, ईट भट्ठा मालिक। संवाद