आजमगढ़। बस अड्डा आजमगढ़ के परिसर में एक दशक पहले संचालित कैंटीन (भोजन प्रतिष्ठान) अभी तक नहीं संचालित हो सका है। इससे यात्रियों के साथ ही रोडवेज कर्मियों को भी परेशान होना पड़ता है। रोडवेज प्रशासन इस बड़ी समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहा है, इससे यहां पहुंचने वाले यात्रियों व अन्य लोगों को महंगे होटलों में अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है।
समाजवादी पार्टी के शासनकाल में सपा संरक्षक मुलायम सह का संसदीय क्षेत्र होने के नाते अत्याधुनिक रोडवेज बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया। 2014 में लगभग 14 करोड़ रुपये की लागत से मॉडल बस टर्मिनल बनाने का निर्माण शुरू हुआ। हालांकि एक वर्ष पूर्व ही रोडवेज भवन बनकर तैयार हो गया लेकिन सुविधाएं न होने के कारण बस यात्रियों को बेहतर सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी। बस अड्डे पर एक दशक से भोजन-नाश्ता व चाय-पानी की कैंटीन आज तक चालू नहीं हो सका। कैंटीन पर उस समय ग्रहण लग गया जब उसे कैंटीन को चलाने के लिए परिवहन निगम मुख्यालय ने अचानक भाड़े को कई गुना बढ़ा दिया। नतीजा हुआ कि कैंटीन में ताले लग गए। इसके लिए हर साल नीलामी का इंतजाम रोडवेज प्रशासन ने किया लेकिन मंहगे किराए के कारण नतीजा शून्य रहा। इससे यात्रियों के साथ ही कर्मचारियों को भी आसपास के होटलों में जाकर महंगे दामों पर भोजन व नाश्ता करने की मजबूरी हो गई है।
पूर्व में एक व्यक्ति ने अधिक दर पर बोली लगाई थी। इसी वजह से करीब 25 से 30 हजार रुपये तक कोई किराया देगा तो ही कैंटीन उसे मिलेगी। उससे कम में टेंडर की बोली नहीं लगेगी। यह सरकार का नियम है, यदि पूर्व मेंं अधिक दर पर दुकान उठी है तो उससे कम नहीं उठनी चाहिए।- मनोज कुमार वाजपेयी, आरएम आजमगढ़।