आजमगढ़। शहर को जाम से मुक्ति दिलाने और पटरियों से अवैध कब्जे हटाने के लिए सरकार ने वेंडिंग जोन बनाने का आदेश दिया था। नगर पालिका ने वेंडिंग जोन का प्रस्ताव तैयार किया था लेकिन उसे अमल में नहीं लाया जा सका। शहर सड़कों की पटरियों पर अव्यवस्थित तरीके से कपड़े, हेलमेट, सजावट की वस्तुओं की दुकानें लगती हैं, जिसके चलते अक्सर जाम लगता है। शहर में पथ विक्रेताओं और ठेले-खोमचे वालों के कारोबार को व्यवस्थित करने के लिए उनका पंजीकरण किया गया। सूडा ने सर्वे करके 1267 वेंडरों का पंजीकरण कराया। प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना शुरू के बाद नगर पालिका ने फिर से पंजकरण शुरू किया तो 3367 वेंडरों की पहचान की गई। पथ विक्रेता और ठेले-खोमचे वालों के पंजीकरण के पीछे उनको व्यवस्थित करने की योजना थी। उनके कामकाज के लिहाज से शहर में 10 वेंडिंग जोन चिह्नित भी कर लिए गए। पर इनको व्यवस्थित नहीं किया जा सका। आज भी पटरी व्यवसायी सड़क के किनारे बेतरतीब तरीके से दुकानों सजा लेते हैं। इससे जाम भी लगता है और हादसों की भी आशंका बनी रहती है। कलक्ट्रेट के पास अग्रसेन तिराहे से शहर कोतवाली तक कपड़े, सजावटी सामान, ढोल-ताशे वाले दुकानें सजा लेते हैं। एक तो इन दुकानों पर भीड़ लगी रहती है और बाइक से चलने वालों का ध्यान विचलित होता है। इससे हमेशा दुर्घटना की आशंका रहती है। यह शहर की सबसे व्यस्त सड़क है। इसी मार्ग पर नगर पालिका कार्यालय, शहर कोतवाली है, जहां लोगों की आवाजाही रहती है। नरौली पुल के दोनों तरफ, नरौली चौराहा, सिधारी पुल और बवाली मोड़ का हाल भी इससे अलग नहीं है।
बनाए जाने हैं वेंडिंग जोन
पुरानी जेल के सामने बंधे पर, पुरानी जेल के उत्तर पानी की टंकी के पास, शिब्ली कालेज चौराहे से श्रीकृष्ण पाठशाला, शनिदेव मंदिर से रोड पटरी पर पूरब, सिधारी तिराहा से मऊ रोड पर, हाईडिल चौराहा से सिधारी रोड, नरौली चौराहा से नदी के तरफ, रेलवे बाउंड्री से सटे सर्फुद्दीनपुर, बवाली मोड़ से रोडवेज तक बाईं तरफ और रोडवेज से मंदिर तक 10 वेंडिंग जोन बनाने के प्रस्ताव हैं। केडीएस नामक कंपनी को इसका डीपीआर तैयार करने का काम सौंपा गया था लेकिन उसने कुछ नहीं किया। इसमें दुकानों का आवंटन, पेयजल, शौचालय और पार्किंग की व्यवस्था की जानी थी।
वेंडरों का पंजीकरण कर लिया गया है लेकिन अभी उन्हें जगह नही जा सकी है। सूडा ने वेंडिंग जोन का डीपीआर तैयार करने का जिम्मा केडीएस नामक कंपनी को सौंपा था लेकिन उनसे काम ही नहीं किया। इसके लिए राज्य नगरीय विकास (सूडा) अभिकरण कार्यालय को पत्र भी भेजा गया है। -एके पांडेय, परियोजना निदेशक, नगरीय विकास अभिकरण (डूडा)