इसमें शिक्षणेत्तर कर्मियों की पदोन्नति और अवकाश नगदीकरण के मुद्दे को लेकर चर्चा की गई।
जिलाध्यक्ष सुशील कुमार सिंह ने कहा कि जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार को दूर करना नये सत्र की प्राथमिकता होगी। जिला विद्यालय निरीक्षक और जेडी कार्यालयों में सबसे ज्यादा सौतेला व्यवहार शिक्षणेतर कर्मचारियों के साथ होता है।
प्रांतीय मंत्री जनार्दन यादव ने कहा कि 24 मार्च 2015 की राजाज्ञा के अनुसार शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का तुरंत वेतन निर्धारण होना चाहिए। जिला मंत्री इंद्रसेन सिंह ने कहा कि लिपकीय संवर्ग में कार्य कर रहे सभी कर्मचारियों का वेतन निर्धारण न्यूनतम ग्रेडपे दो हजार से लेकर ग्रेड पे 46 सौ में होना है। वेतन निर्धारण न होने से जिले के सभी शिक्षणेत्तर कर्मचारियों में आक्रोश व्याप्त है। वक्ताओं ने कहा कि हम अपनी हक की लड़ाई पर अडिग हैं और मांग माने जाने तक लड़ाई लड़ते रहेंगे।
इस मौके पर बलवंत सिंह, संतोष कुमार सिंह, शमीम अहमद, अभय कुमार, राजेश श्रीवास्तव, कप्तान राय, अजय कुमार सोनकर, मटरू सोनकर, महेंद्र सिंह, कमलेश यादव, राकेश राय, विपिन सिंह आदि शामिल हुए।