आजमगढ़। स्वयं सहायता समूह की सखियां क्यारियों के लिए हरियाली का सामान तैयार कर अपनी जिंदगी में भी मिठास घोल रही हैं। जिले के 20 समूहों की महिलाएं आधुनिक उन्नत तरीके से गन्ने की नर्सरी तैयार कर रही हैं। नर्सरी में तैयार गन्ने की रोपाई से बीज की लागत कम आती है और पौधे निरोग रहते हैं। किसानों को भी लाभ होता है और समूह की महिलाओं के लिए आमदनी का जरिया पैदा हो गया है।
जिले में चीनी मिल होने के कारण नगदी फसल के रूप में गन्ने की खेती बड़े पैमाने पर होती है। अब तक गन्ने की गड़रियां काट कर किसान खेतों में रोपते हैं। उनमें से तमाम पौध उगते ही नहीं है। अब गन्ना विभाग सिंगल बड चिप विधि से नर्सरी तैयार करके गन्ने की रोपाई पर जोर दे रहा है। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को इसकी नर्सरी तैयार करने की प्रशिक्षण दिया जा रहा है। महिलाएं गन्ने सीडलिंग (एक आंख की पौध) से पौधा तैयार करेंगी, जिसे खेतों में रोपा जाएगा। इस विधि से गन्ने का बीज भी कम लगता है क्योंकि जमाव की दर 90 फीसदी होती है।
जिला गन्ना अधिकारी अशर्फी लाल ने बताया कि पारंपरिक तरीके से गन्ने की बुवाई करने में प्रति हेक्टेयर 60-65 क्विंटल बीज लगता है। इसकी कीमत 26 हजार रुपये है। सिंगल बड चिप से नर्सरी तैयार कर बुआई करने पर 45 क्विंटल बीज ही लगेगा। इस तरह किसान को बीज में ही 20 फीसदी तक की बचत होगी। नर्सरी में तैयार पौदा रोग एवं कीटों से मुक्त होता है।
नर्सरी के लिए मिलती है सब्सिडी
आजमगढ़। महिलाओं को अपने घर के संसाधनों से ही सिंगल बड चिप तकनीक से पौधे तैयार कर सकती हैं। इसके लिए विभाग प्रति पौधा 1.5 रुपये प्रोत्साहन राशि महिला समूहों को देता है। पिछले साल समूहों ने 2.5 लाख पौधों की नर्सरी तैयार की है। इससे 10 हेक्टेयर में नई तकनीक से गन्ने की रोपाई की गई है। इस साल 10 लाख पौधे तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
महिला समूहों के जरिए कुल दस लाख नर्सरी तैयार करने लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए समूहों की सदस्यों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। इस तरह महिलाओं को रोजगार मिल रहा है और गन्ने की खेती की गुणवत्ता भी सुधर रही है और किसानों का मुनाफा बढ़ रहा है।-अशर्फी लाल, जिला गन्ना अधिकारी