1985 में कांग्रेस अपनी जीत को बचाने में कामयाब रही और भीखा राम विधायक बने। लेकिन 1989 के चुनाव में एक बार फिर दयाराम भाष्कर बसपा के टिकट पर मैदान में उतरे और जीत हासिल कर तीसरी बार विधायक बने। इस चुनाव में दो महिलाएं विद्या देवी और ललिता देवी भी मैदान में उतरी लेकिन दोनों ही अपनी जमानत भी नहीं बचा सकीं।
2002 में आरटीकेपी के टिकट पर चंपा देवी, 2007 में बीआरपीपी के टिकट पर पूनम देवी, 2012 में एसबीएसपी के टिकट पर सुशीला और 2017 में आईएनडी के टिकट पर अर्चना मैदान में उतरी लेकिन इनमें से कोई भी जमानत बचाने के लिए जरूरी पोलिंग का 1/6 वोट हासिल नहीं कर सका।
वर्ष विधायक पार्टी
1962 मंगलदेव पीएसपी
1974 दयाराम भाष्कर बीकेडी
1977 दयाराम भाष्कर जेएनपी
1980 लालसा कांग्रेस
1985 भीखाराम कांग्रेस
1989 दयाराम भाष्कर बसपा
1991 पतिराज भाजपा
1993 सामी बसपा
1996 हीरालाल गौतम बसपा
2002 हीरालाल गौतम बसपा
2007 भोला पासवान सपा
2012 आदिल शेख सपा
2017 सुखदेव राजभर बसपा
आजादी के बाद हुए चुनावों में पहले सरायमीर को विधानसभा का दर्जा नहीं प्राप्त था। 1962 में इसे विधानसभा बनाया गया लेकिन फिर दो चुनावों में यह खत्म हो गया। इसके बाद 1974 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर यह सीट अस्तित्व में आई और 2007 तक सरायमीर विधानसभा सीट के नाम से चुनाव संपन्न कराए गए।
लेकिन 2012 में इस सीट का नाम परिवर्तित कर दीदारगंज विधानसभा सीट कर दिया गया। अब तक इस पर दो चुनाव कराए जा चुके हैं। जिसमें एक बार सपा तो एक बार बसपा को जीत हासिल हो चुकी है। इस विधानसभा में कुल मतदाताओं की संख्या 364668 है। जिसमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 190550 और महिला मतदाताओं की संख्या 174112 है।