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दो साल से बिना फिटनेस फर्राटा भर रहे स्कूली वाहन

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आजमगढ़। इसे लापरवाही कहें... मनमानी... या फिर अनदेखी ? कुछ भी हो, लेकिन स्कूल वाहनों की फिटनेस कराने में शिक्षण संस्थान ही लापरवाह और मनमाना रवैया अख्तियार नहीं किए हैं बल्कि परिवहन विभाग के अफसर भी जिम्मेदार हैं। जांच में सामने आया कि दो साल से स्कूली वाहनों की फिटनेस तक नहीं कराई गई। जरूरत महसूस होने पर स्कूलों को नोटिस भेजकर औपचारिकताएं पूरी कर लीं गईं, लेकिन अब गाजियाबाद में हुई घटना के बाद परिवहन विभाग की नींद टूटी है। सख्ती दिखाई जा रही है।
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पिछले दिनों गाजियाबाद के मोदीनगर में स्कूल बस से बाहर झांकते समय कक्षा चार के छात्र की दर्दनाक मौत हो गई थी। इस हादसे के बाद सरकार गंभीर हुई। जिले से स्कूली वाहनों की जांच कर रिपोर्ट मांगी। इस मामले को लेकर अमर उजाला पिछले कई दिनों से अभियान चला रहा है। शासन की सख्ती और लगातार जारी अभियान का असर भी दिख रहा है। जिले का परिवहन विभाग भी हरकत में आया। जिम्मेदारों ने स्कूल प्रबंधकों को नोटिस भेजकर जल्द से जल्द स्कूली वाहनों की फिटनेस कराने के आदेश दिए। पर एक सप्ताह में महज 150 स्कूली वाहनों की ही फिटनेस हो सकी। परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिले में 1853 स्कूली वाहन हैं, लेकिन इस अभियान के चलने से पहले 778 वाहन अनफिट चल रहे थे। अब भी 500 से अधिक स्कूली वाहन हैं, जिनकी फिटनेस नहीं हो सकी है। इसके पीछे स्कूलों को संचालित करने वाले जिम्मेदार तो जवाबदेह हैं ही, साथ ही परिवहन विभाग भी कम जिम्मेदार नहीं है।
इन सवालों से कठघरे में परिवहन विभाग
- गाजियाबाद में हुई घटना और शासन की सख्ती के बाद ही क्यों जागे जिम्मेदार।
- बिना फिटनेस क्यों चलने दिए गए स्कूली वाहन।
- जिम्मेदारों ने इससे पहले इनती सख्ती क्यों नहीं दिखाई।
- कार्रवाई के नाम पर सिर्फ नोटिस भेजकर औपचारिकताएं क्यों पूरी की गईं।
- जो सख्ती और अभियान अब चल रहा है, यह पहले क्यों नहीं चलाया गया।
स्कूल खुलने के बाद भी नहीं आई याद
आजमगढ़। अप्रैल से नए सत्र की शुरुआत हो चुकी है। स्कूल-कॉलेज खुल चुके थे। कोरोना काल में खड़े रहे स्कूली वाहन सड़कों पर फिर से बच्चों को लेकर दौड़ने लगे। इसकी जानकारी परिवहन विभाग को थी। बच्चों की सुरक्षा को लेकर जिम्मेदारों को बसों की जांच करनी चाहिए थी, लेकिन सुध नहीं ली। न ही इन स्कूल प्रबंधकों को नोटिस भेजकर वाहनों की फिटनेस कराने के आदेश दिए गए और न ही बिना फिटनेस सड़कों पर चल रहे वाहनों पर कार्रवाई की गई। जब गाजियाबाद में घटना हुई तो कार्रवाई की याद आ गई।
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एआरटीओ प्रशासन सतेंद्र कुमार यादव ने बताया कि शासन के निर्देश पर स्कूली वाहनों के फिटनेस को लेकर अभियान चलाया गया है। अभी अभियान चल भी रहा है। एक सप्ताह में करीब 70 वाहनों का चालान किया गया। सीज की कार्रवाई इसलिए नहीं की गई कि बच्चों की परीक्षाएं चल रही थी। ताकि वह प्रभावित न हो।
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