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Azamgarh News: संस्कृत और संस्कार मिटने से खतरे में पड़ जाएगा सनातन

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लालगंज। संस्कृत और संस्कार मिटने से सनातन धर्म खतरे में पड़ जाएगा। भारत की संस्कृति शब्दों का सम्मान करती है और पूर्वजों की मर्यादाओं को अपनाना जरूरी है।
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उक्त बातें काशी सुमेरु पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती ने खनियरा गांव के एक विद्यालय में आयोजित अंतरराष्ट्रीय रामायण महासम्मेलन के दूसरे दिन बतौर मुख्य अतिथि कहीं। उन्होंने कहा कि हनुमान जी का जन्मोत्सव चारों युगों में उनके प्रताप का प्रतीक है। राम राज्य में सभी को सम्मान और स्वतंत्रता थी, जहां शेर और सियार एक घाट पर पानी पीते थे।
स्वामी नरेंद्रानंद ने भारत में समान शिक्षा नीति, समान कानून नीति, समान नागरिक संहिता नीति होनी चाहिए। तभी भारत में राम राज्य स्थापित होगा। विद्यालयों में केजी से लेकर स्नातकोत्तर तक नैतिक शिक्षा की आवश्यकता है। आतंकवाद भारत में समाप्त करना है तो जेलों में वीवीआईपी व्यवस्था नहीं दी जानी चाहिए। 30 से 90 दिन के अंदर कार्रवाई करनी चाहिए। सभी की संपत्तियां जब्त करते हुए फांसी पर लटका देने की आवश्यकता है। देश का सुधार हो जाएगा। देश का सुधार होगा तो रामराज आ जाएगा।
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कार्यक्रम में बृजभूषण जी महाराज, कन्हैया सिंह, वशिष्ठ, अनूप, डॉ. शिल्पा सिंह, उमेश सिंह, मुकेश सिंह, अभिजीत सिंह, कुसुम सिंह, प्रो. जगदंबा दुबे आदि उपस्थित रहे। संचालन डॉ. अपर्णा सिंह ने किया जबकि नवभारत निर्माण समिति के सचिव बृजेश सिंह ने अतिथियों का आभार जताया।
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