आजमगढ़। होली के बाद कामकाजियों के लौटने से ट्रेनों में भीड़ बढ़नी शुरू हो गई है। मंगलवार से ही लोग परदेश वापस लौट रहे हैं। हालात यह हैं कि ट्रेनों में अगले एक माह तक किसी भी ट्रेन में सीट खाली नहीं है। लंबी दूरी की ट्रेनों में भारी वेटिंग लिस्ट होने की वजह से टिकट खिड़कियों पर मारामारी मची हुई है। इसी का फायदा उठाते हुए टिकट दलाल अधिक पैसे लेकर उन्हें तत्काल टिकट उपलब्ध करा रहें हैं।
कोरोना काल में कई ट्रेनों को बंद कर दिया गया था। लॉकडाउन खुलने के बाद धीरे-धीरे ट्रेनों का संचालन शुरू हो गया। रेलवे ने ट्रेनों को स्पेशल ट्रेन के रूप में चलाया। साथ ही बिना कंफर्म टिकट के यात्रा न करने की रोक लगा दी गई है। गोदान एक्सप्रेस, उत्सर्ग एक्सप्रेस, ताप्ती गंगा एक्सप्रेस व कैफियात एक्सप्रेस समेत सभी ट्रेनों में लंबी वेटिंग लिस्ट से यात्री परेशान हैं। बस तत्काल टिकट ही लोगों के लिए सहारा बना हुआ है। ऐसे में यात्री तत्काल टिकट के लिए सुबह से ही लाइन में लगे रहते हैं। घंटों लाइन में लगने के बाद भी लोगों को मायूस होकर लौटना पड़ता है। इसके बाद दूसरे दिन वह फिर टिकट के लिए लाइन में खड़े होते हैं। कई दिनों तक उन्हें तत्काल टिकट नहीं मिलता है तो वह टिकट दलाल की शरण में जाते हैं।
इंटरनेट की दुनिया में आइआरसीटीसी के समानांतर चल रहे फर्जी साफ्टवेयर रेलवे की वेबसाइट से भी तेज चलते हैं। सुबह दस बजे जैसे ही रेलवे काउंटरों पर टिकटों की बुकिंग शुरू होती है, वे अपना काम करना शुरू कर देते हैं। रेलवे काउंटर पर बैठा क्लर्क जब तक यात्री का नाम और पता भरकर पूछताछ करता है। तब तक नेट पर 80 से 90 फीसद कंफर्म टिकट बुक हो जाते हैं।
तत्काल ई-टिकट की दलाली करने वाले एजेंट, अपने रिश्तेदार, दोस्त और अन्य के नाम पर मेल आईडी के जरिए आईआरसीटीसी की आईडी बनाते हैं। एक आईडी से एक माह में अधिकतम छह तत्काल टिकट बनती हैं, लेकिन यदि 100 आईडी होती हैं तो 600 टिकट बनती हैं। तत्काल होने के कारण इनमें आरक्षित सीट मिलने की संभावना अधिक है, इसलिए परेशान यात्री को इसके लिए दो से तीन गुना तक किराया वसूला जाता है। वह मजबूर होकर देते भी हैं।