आजमगढ़। जनपदवासियों की काफी दिनों से चली आ रही राज्य विश्वविद्यालय की मांग तो पूरी हो गई। लेकिन अभी राज्य विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। क्योंकि अभी तक यशपालपुर-आजमबांध की जमीन को विश्वविद्यालय के नाम करने का कोई निर्देश शासन से जिला प्रशासन के पास नहीं आया है। लेकिन इस वर्ष विद्यार्थियों को पूर्वांचल विश्वविद्यालय से ही संबद्घ करने का निर्देश आ गया है।
550 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित होने वाले राज्य विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए अभी लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। क्योंकि काफी दिनों तक विश्वविद्यालय के लिए जमीन का मामला अटका हुआ था। मोहब्बतपुर में देखी गई जमीन के लो-लैंड होने के कारण शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन ने यशपालपुर-आजमबांध में दूसरी जमीन तलाश की। जमीन मिली लेकिन इसमें भी पेंच फंस गया क्योंकि यह जमीन चारागाह की थी। फिर शासन ने कैबिनेट में लैंडयूज परिवर्तन का प्रस्ताव पास कर दिया। जिसमें यशपालपुर-आजमबांध की जमीन को विश्वविद्यालय के नाम करने और मोहब्बतपुर की जमीन को चारागाह घोषित करने की बात कही। लेकिन अभी तक इस संबंध में कोई भी निर्देश जिला प्रशासन को नहीं मिला है। जिसके कारण दोनों जमीनों के लैंडयूज परिवर्तन का मामला खटाई में पड़ा हुआ है। राज्य विश्वविद्यालय के निर्माण की बात दूर अभी तक शासन की ओर से वीसी की तैनाती भी नहीं की गई है। लेकिन उसके स्थान पर शासन की ओर से एक पत्र आया है जिसमें कहा गया है कि जब तक यहां वीसी की तैनाती नहीं होगी। विद्यार्थी पहले की तरह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से संबद्घ रहेंगे। हरीशंकर, सीआरओ ने कहा कि सुनने में आया कि कैबिनेट में जमीनों के लैंडयूज परिवर्तन को मंजूरी मिल गई लेकिन अब तक शासन की ओर से कोई दिशा निर्देश नहीं आया है। जब तक शासन से कोई निर्देश नहीं मिलता तब कार्य आगे नहीं बढ़ सकता है।
पहले वीसी की नियुक्ति शासन से होनी है। जो नहीं हो सकी है लेकिन विश्वविद्यालय का खाता खुल चुका है। लेकिन जब तक कुलपति की नियुक्ति नहीं हो जाती तब तक राज्य विश्वविद्यालय से संबद्घ महाविद्यालयों की सारी गतिविधियां पूर्वांचल विश्वविद्यालय से संपन्न होंगी। इस संबंध में शासन स्तर से पत्र आया है।
डा. ज्ञान प्रकाश वर्मा, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी।