उपचुनाव को सकुशल कराने के लिए जिला प्रशासन ने लोकसभा क्षेत्र आजमगढ़ को 15 जोन और 137 सेक्टर में बांटा है। प्रत्येक विधानसभा में तीन-तीन जोन और 28 से 30 की संख्या में सेक्टर बांटे गए हैं।
- विधानसभा पुरुष महिला कुल मतदाता
गोपालपुर 187301 163453 350755
सगड़ी 179297 156691 335990
मुबारकपुर 185221 168110 353333
आजमगढ़ 207581 187621 395202
मेंहनगर 291535 192093 403650
शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली, दिनेश लाल यादव, धर्मेंद्र यादव
- फोटो : अमर उजाला
बदली सियासी परिस्थितियों में आजमगढ़ लोकसभा क्षेत्र का उपचुनाव रोचक हो गया है। आजमगढ़ में सैफई परिवार की प्रतिष्ठा दांव पर है। शीर्ष नेतृत्व को आजमगढ़ में प्रत्याशी तय करने में वक्त जरूर लगा, लेकिन इसके पीछे कई वजहें रहीं। हालांकि तमाम चर्चाओं के बाद यहां से पूर्व धर्मेंद्र यादव का नाम तय किया गया। ऐसे में सपा के सामने गढ़ बचाने की चुनौती है।
आजमगढ़ लोकसभा क्षेत्र में करीब 18.38 लाख मतदाता हैं। इनमें करीब साढ़े तीन लाख यादवों समेत ओबीसी के कुल मतदाताओं की संख्या साढे़ छह लाख से अधिक है। साढ़े चार लाख दलित, साढ़े तीन लाख मुस्लिम और तीन लाख सवर्ण मतदाता हैं। आजमगढ़ लोकसभा क्षेत्र में गोपालपुर, सगड़ी, मुबारकपुर, आजमगढ़ सदर और मेहनगर विधान सभा क्षेत्र हैं। इन सभी सीटों पर सपा के विधायक हैं।
वर्ष 2019 में सपा-बसपा का गठबंधन था, जिसमें अखिलेश यादव को 6.21 लाख और भाजपा के दिनेश लाल यादव को 3.61 लाख और सुभासपा को 10 हजार से अधिक वोट मिले थे। स्थिति साफ है कि 2019 में यादव, मुस्लिम के साथ दलित वोट भी सपा के साथ था। इस बार बसपा ने शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली को मैदान में उतार कर मुस्लिम-दलित गठजोड़ पर दांव खेला है।
ऐसे में सपा के सामने मुस्लिम और यादव वोट बैंक को अपने पाले में बनाए रखने और दलितों को जोड़ने की चुनौती है। यही वजह है कि सपा ने पहले दलित उम्मीदवार के रूप में सुशील आनंद को उतारने की तैयारी की थी, लेकिन उनका नाम दो विधान सभा क्षेत्र में होने से पर्चा खारिज होने की आशंका थी। वहीं, स्थानीय सपाइयों में सिर फुटौव्वल न हो, इससे बचने के लिए सैफई परिवार से धर्मेंद्र यादव को मैदान में उतारना पड़ा।