फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Lok Sabha By Election: आजमगढ़ में आज 1149 मतदान केंद्रों पर वोटिंग जारी, 18.38 लाख मतदाता करेंगे 13 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला

Thu, 23 Jun 2022 10:10 AM IST
उत्पल कांत संवाद न्यूज एजेंसी, आजमगढ़

सार

आजमगढ़ लोकसभा सीट पर उपचुनाव के लिए आज मतदान जारी है।  1149 मतदान केंद्रों पर   पांच विधानसभाओं के 1838930 मतदाता 13 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करेंगे। 
विज्ञापन
आजमगढ़ में उपचुनाव के लिए वोटिंग जारी - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए आज का दिन अहम है। आजमगढ़ लोकसभा सीट पर सुबह सात बजे से 1149 मतदान केंद्रों पर मतदान शुरू हो गया है जो शाम छह बजे तक चलेगा। सुबह से ही बूथों पर मतदाता पहुंचने लगे। उमसभरी गर्मी और चिलचिलाती धूप के बीच मतदान को लेकर मतदाताओं में उत्साह नजर आ रहा है। सुबह नौ बजे तक मतदान प्रतिशत 9.21 रहा। विधानसभावार देखा जाए तो गोपालपुर के मतदाता सबसे जागरूक दिखे, वहां 10.1 मतदान प्रतिशत रहा।

विज्ञापन


मतदान के बाद पोलिंग पार्टियां अपने बूथों से एफसीआई गोदाम बेलइसा पहुंचेंगी जहां ईवीएम को जमा किया जाएगा। उपचुनाव में आजमगढ़ संसदीय सीट के पांच विधानसभा आजमगढ़, गोपालपुर, सगड़ी, मुबारकपुर और सुरक्षित सीट मेंहनगर विधानसभा क्षेत्र के मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे।

इस उपचुनाव में कुल 13 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। पुरुष मतदाताओं की कुल संख्या नौ लाख 70 हजार 935 और महिला मतदाताओं की कुल संख्या आठ लाख 67 हजार 968 है। सपा मुखिया अखिलेश यादव के आजमगढ़ सदर संसदीय सीट से इस्तीफा देने के बाद खाली हुई सीट पर उपचुनाव हो रहा है। 
विज्ञापन


सर्फुद्दीनपुर बूथ का डीएम व एसपी ने किया निरीक्षण
मतदान शुरू होते ही डीएम विशाल भारद्वाज और एसपी अनुराग आर्य बूथों का चक्रमण करने निकल पड़े। सबसे पहले उनका काफिला सर्फुद्दीनपुर बूथ पर पहुंचा। इस दौरान डीएम और एसपी ने लोगों से निर्भिक होकर मतदान करने की अपील की। बताते चलें कि 2022 के विधानसभा चुनाव में सर्फुद्दीनपुर बूथ पर बूथ कैप्चरिंग की शिकायत पर सपा और भाजपा समर्थकों के बीच झड़प हो गई थी। 
जिसे देखते हुए इस बूथ को लेकिन पुलिस प्रशासन काफी मुस्तैद नजर आ रहा है। एसपी ने चुनाव के दौरान सुरक्षा की व्यवस्थाओं पर प्रकाश डाला। 

विधानसभावार महिला व पुरुष मतदाताओं की स्थिति

उपचुनाव को सकुशल कराने के लिए जिला प्रशासन ने लोकसभा क्षेत्र आजमगढ़ को 15 जोन और 137 सेक्टर में बांटा  है। प्रत्येक विधानसभा में तीन-तीन जोन और 28 से 30 की संख्या में सेक्टर बांटे गए हैं।
 
  • विधानसभा      पुरुष        महिला          कुल मतदाता
          गोपालपुर     187301      163453           350755
          सगड़ी           179297      156691          335990
          मुबारकपुर    185221       168110          353333
         आजमगढ़     207581      187621           395202
          मेंहनगर       291535       192093          403650

बदले सियासी समीकरण में मुकाबला रोचक, सपा के सामने गढ़ बचाने की चुनौती

शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली, दिनेश लाल यादव, धर्मेंद्र यादव - फोटो : अमर उजाला
बदली सियासी परिस्थितियों में आजमगढ़ लोकसभा क्षेत्र का उपचुनाव रोचक हो गया है। आजमगढ़ में सैफई परिवार की प्रतिष्ठा दांव पर है। शीर्ष नेतृत्व को आजमगढ़ में प्रत्याशी तय करने में वक्त जरूर लगा, लेकिन इसके पीछे कई वजहें रहीं। हालांकि तमाम चर्चाओं के बाद यहां से पूर्व धर्मेंद्र यादव का नाम तय किया गया। ऐसे में सपा के सामने गढ़ बचाने की चुनौती है।

आजमगढ़ लोकसभा क्षेत्र में करीब 18.38 लाख मतदाता हैं। इनमें करीब साढ़े तीन लाख यादवों समेत ओबीसी के कुल मतदाताओं की संख्या साढे़ छह लाख से अधिक है। साढ़े चार लाख दलित, साढ़े तीन लाख मुस्लिम और तीन लाख सवर्ण मतदाता हैं। आजमगढ़ लोकसभा क्षेत्र में गोपालपुर, सगड़ी, मुबारकपुर, आजमगढ़ सदर और मेहनगर विधान सभा क्षेत्र हैं। इन सभी सीटों पर सपा के विधायक हैं।
 
विज्ञापन

सपा के सामने ये है बड़ी चुनौती

वर्ष 2019 में सपा-बसपा का गठबंधन था, जिसमें अखिलेश यादव को 6.21 लाख और भाजपा के दिनेश लाल यादव को 3.61 लाख और सुभासपा को 10 हजार से अधिक वोट मिले थे। स्थिति साफ है कि 2019 में यादव, मुस्लिम के साथ दलित वोट भी सपा के साथ था। इस बार बसपा ने शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली को मैदान में उतार कर मुस्लिम-दलित गठजोड़ पर दांव खेला है।

ऐसे में सपा के सामने मुस्लिम और यादव वोट बैंक को अपने पाले में बनाए रखने और दलितों को जोड़ने की चुनौती है। यही वजह है कि सपा ने पहले दलित उम्मीदवार के रूप में सुशील आनंद को उतारने की तैयारी की थी, लेकिन उनका नाम दो विधान सभा क्षेत्र में होने से पर्चा खारिज होने की आशंका थी। वहीं, स्थानीय सपाइयों में सिर फुटौव्वल न हो, इससे बचने के लिए सैफई परिवार से धर्मेंद्र यादव को मैदान में उतारना पड़ा। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें