राजकीय मेडिकल कॉलेज चक्रपानपुर के निर्माण के लिए अपनी जमीन देने वाले परिवारों के सामने आज रोजी-रोटी का संकट खड़ा है। वर्षों पहले जमीन देने के दौरान परिवार के एक सदस्य को मेडिकल कॉलेज में नौकरी देने का भरोसा दिया गया था।
इसी भरोसे पर कई परिवारों ने अपनी जमीन दी और वर्ष 2012 से मेडिकल कॉलेज में रोजगार करते रहे। लेकिन वर्ष 2025 में सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव के बाद अचानक करीब 110 कर्मचारियों की नौकरी चली गई। अब इनमें कई कर्मचारी 40 से 55 वर्ष की उम्र में दोबारा रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं।
छंटनी से प्रभावित कर्मचारियों का कहना है कि जब जमीन ली गई थी, तब हमें भरोसा दिया गया था कि परिवार के एक सदस्य को नौकरी मिलने से उनके जीवन-यापन का रास्ता बना रहेगा।
वर्षों तक उन्होंने मेडिकल कॉलेज में अपनी सेवाएं दीं लेकिन कोलकाता में हुए एक हादसे के बाद शासन स्तर से मेडिकल कॉलेजों की सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव करते हुए सुरक्षा की जिम्मेदारी भूतपूर्व सैनिकों को देने का निर्णय लिया गया। इसका सबसे बड़ा असर उन स्थानीय कर्मचारियों पर पड़ा, जिनका रोजगार वर्षों से इसी व्यवस्था से जुड़ा था।
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विधायक से लेकर मुख्यमंत्री तक लगाई गुहार, संसद में भी उठी आवाज
नौकरी जाने के बाद प्रभावित कर्मचारी अपनी फरियाद लेकर आजमगढ़ के पांच विधायकों के पास पहुंचे। विधायक स्वयं पहुंचकर मेडिकल कॉलेज प्रशासन से उन्हें समायोजित करने का आग्रह किया, लेकिन शासन के आदेश का हवाला देकर प्रशासन ने असमर्थता जता दी। इसके बाद कर्मचारियों ने मंडलायुक्त और जिलाधिकारी के समक्ष भी अपनी समस्या रखी। मामला शासन स्तर का होने की जानकारी मिलने पर प्रभावित कर्मियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक से भी कई बार मुलाकात कर अपनी समस्या बताई। बावजूद इसके अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका है।
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बोले कर्मचारी...अब इस उम्र में हमें कौन देगा नौकरी?
34 वर्ष की उम्र में मेडिकल कॉलेज में नौकरी पर लगे, हमसे जमीन लेते समय मुआवजे के साथ नौकरी का भरोसा दिया गया था। उसी भरोसे पर हमने अपनी जमीन दी और वर्षों तक मेडिकल कॉलेज में काम किया। इस उम्र में हम कौन सा काम करें, जिससे परिवार का पालन-पोषण हो सके? हमारी जमीन भी गई और नौकरी भी। -वीरेंद्र यादव,
जब पढ़ने और नौकरी पाने का समय था, तब मेडिकल कॉलेज में नौकरी मिल गई थी। अब अचानक बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। न अब पढ़ने की उम्र रही और न ही आसानी से नई नौकरी मिलने की उम्मीद है। मंत्री, विधायक और जिलाधिकारी तक अपनी बात पहुंचा चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं हुआ। -सुरेंद्र यादव
जब जीवन में कुछ कर सकता था, तब मेडिकल कॉलेज में नौकरी मिल गई। अब मेरी उम्र 38 वर्ष हो गई है। परिवार में बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। बेरोजगारी में बच्चों को पढ़ाना और घर चलाना मुश्किल हो गया है। रोज दिमाग में यही लगा रहता है कि जीवन कैसे चलेगा। जीवन बड़ी मुश्किल से बीत रहा है। -मनोज कुमार
32 साल की उम्र में मेडिकल कॉलेज में सुरक्षा कर्मी के रूप में नौकरी करने लगा था। अब अचानक 2025 में नौकरी चली गई। खेती करने की जमीन भी चली गई। अब सामने जीवन-यापन का संकट खड़ा हो गया है। बच्चों की पढ़ाई और परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। -उमेश कुमार
00वर्जन
मेडिकल कॉलेज से यह नहीं किया गया है। शासन के निर्देश पर इनको हटाकर पूर्व सैनिकों की तैनाती की गई है। इनकी फाइल शासन को भेजी गई है । उम्मीद है इनकी नियुक्ति को जल्द बहाल कर दिया जाएगा। -बीडी सिंह, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज चक्रपानपुर।