आजमगढ़। साइना नेहवाल, महेंद्र सिंह धोनी आजमगढ़ से कैसे निकल सकते हैं जब स्टेडियम में उनको प्रशिक्षण देने वाला ही कोई नहीं है। सुखदेव पहलवान स्पोर्ट्स स्टेडियम में नौ खेलों में 312 खिलाड़ी पंजीकृत हैं, जो खुद ही अभ्यास करते हैं। उनको कोई भी स्पोर्ट्स की तकनीकी बारीकियों को बताने वाला नहीं है।
सुखदेव पहलवान स्पोर्ट्स स्टेडियम में बैडमिंटन, क्रिकेट, कुश्ती, एथलेटिक्स, फुटबाल, कबड्डी, बास्केटबाल, हाकी आदि खेलों अलावा एक जिम भी है। इनमें पंजीकृत खिलाड़ियों की संख्या 312 है। इन खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करने के लिए मात्र दो कोच हैं। एक कुश्ती कोच और दूसरे उप क्रीड़ाधिकारी और जिम ट्रेनर। पहले सभी खेलों के लिए संविदा पर कोच रखे जाते थे। इनकी हर साल मार्च माह में तैनाती की जाती है। वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के कारण मार्च के महीने में लाक डाउन घोषित हो गया और स्टेडियम को बंद कर दिया गया। लिहाजा इस बार संविदा कोच की भी तैनाती नहीं हुई। अनलाक की प्रक्रिया शुरू होने के बाद स्टेडियम तो खुला लेकिन कोच की व्यवस्था नहीं हो पाई। खिलाड़ियों ने पंजीकरण करा लिया है और उनसे हर महीने 300 रुपये भी लिया जा रहा है लेकिन उन्हें खेल की बारीकियां सिखाने वाला कोई नहीं है। ये खिलाड़ी पहल तैनात रहे कोचों पर ही निर्भर हैं। वे ही इन्हें खेल के कुछ गुर सिखाने जब-तब चले आते हैं। उधर, तैनाती नहीं होने से संविदा कोचों के सामने भी रोजगार का संकट पैदा हो गया है। मानदेय नहीं मिलने के कारण उनके लिए घर-गृहस्थी चलाना मुश्किल हो रहा है।
विभिन्न खेलों में पंजीकृत खिलाड़ी और तैनात कोच
स्टेडियम में जिम को लेकर कुल 312 खिलाड़ी पंजीकृत हैं। इसके अलावा 62 शौकिया खिलाड़ी भी पंजीकृत हैं जो टहलने के लिए या दौड़ने के लिए यहां आते हैं। सिर्फ कुश्ती और जिम को छोड़कर किसी भी खेल के प्रशिक्षक की तैनाती इस बार नहीं हुई है। अब क्यों नहीं हुई इस बारे में निदेशालय ही कुछ बता सकता है हम कुछ नहीं कह सकते हैं।
आरएन सिंह, क्षेत्रीय उप्रक्रीड़ाधिकारी व कुश्ती कोच।