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हुनर सिखा कर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाती हैं हिना

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हिना देसाई।- समाजसेवी - फोटो : AZAMGARH
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सगड़ी क्षेत्र के जोकहरा में स्थित श्री रामानंद सरस्वती पुस्तकालय की निदेशक हिना देसाई किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। गुजरात छोड़कर वे गांव में आईं और जीवन समाज सेवा के प्रति समर्पित कर दिया। वे न सिर्फ घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए आवाज बुलंद करती हैं बल्कि महिलाओं को हुनर सिखा कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाती हैं।
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श्री रामानंद सरस्वती पुस्तकालय जोकहरा की निदेशक हिना देसाई का समाज सेवा में विशेष योगदान है। वे महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही हैं। मूल रूप से गुजरात की रहने वाली हिना देसाई जब डॉ. वीएन राय से मिली तो उन्होंने हिना को श्री रामानंद सरस्वती पुस्तकालय आने का निमंत्रण दिया। जब वह एक बार यहां आईं तो वह यहीं की होकर रह गई। यहां आकर उन्होंने महिलाओं के हक की लड़ाई लड़ी। महिलाओं की आवाज बुलंद की। समाज और परिवार से पीड़ित महिलाओं को पुस्तकालय में लाकर उन्हें इस योग्य बनाया कि वे अपने पैरों पर खड़ी होकर आत्मनिर्भर बने। इतना भी नहीं उनके हक की लड़ाई भी लड़ी। जिसका परिणाम है कि आज हजारों महिलाएं इस पुस्तकालय से जुड़ कर आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। उनका कहना है कि वह इस काम को और आगे बढ़ाना चाहती हैं और लगातार इसमें लगी हुई हैं। पुस्तकालय के माध्यम से स्वयंसेवी संस्थाएं, महिला समूह बनाकर महिलाओं को कुटीर उद्योग से जोड़ा। परिवार विच्छेदन के मामलों में दोनों पक्षों को बैठा कर समझाया बुझाया। अब तक हजारों ऐसे पति-पत्नी हैं जिनको एक करने का काम किया है। घरेलू हिंसा पर बहुत सारे काम कराए गए हैं। आज भी पीड़ित महिलाएं घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाएं आदि सभी रामानंद सरस्वती पुस्तकालय आती हैं। हिना देसाई नौकरी छोड़कर समाज सेवा में भाग लिया और उसे आजमगढ़ जनपद के देवारा अंचल में हजारों महिलाओं को रोजगार से जोड़ा बल्कि उनके अंदर आत्म बल भी पैदा किया।
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