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Azamgarh News: कर्ज लेकर कमाने गया रूस, पता लगाने के लिए बहन ने दूतावास को लिए 50 ईमेल

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आजमगढ़। परिवार को अच्छे से रखने के लिए जिले के एक युवक ने भैंस बेची और कर्ज लिया। उन पैसों से रूस गया, लेकिन उसे क्या पता था कि वह एक जाल में फंस जाएगा। युवक कहां हैं इस बारे में किसी को पता नहीं है। इस मामले में बहन ने भारतीय दूतावास में भाई का पता लगाने के लिए 50 से ज्यादा ई-मेल किए, लेकिन एंबेसी ने कोई जवाब नहीं दिया।
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कंधरापुर थाना क्षेत्र के खोजापुर माधोपट्टी निवासी योगेंद्र यादव पुत्र जयराम जनवरी 2024 में कमाने के लिए रूस गया था। रूस वह मऊ जिले के निवासी विनोद यादव के कहने पर गया था। योगेंद्र के साथ विनोद भी गया है। उसका भी पता नहीं चल पा रहा है। योगेंद्र की मां दुर्गावती देवी ने बताया कि रूस जाने के लिए उसने भैंस बेच दी। साथ ही लोगों से कर्ज भी ले लिया। पत्नी अनीता ने कहा कि रूस जाने के बाद उन्होंने अपने भाई राम नगीना के खाते में दो बार में एक लाख रुपये भेजे थे। मई से ही उनकी कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है। बहन खुशबू यादव ने बताया कि वह दिल्ली में रहकर पढ़ाई करती है। भाई का पता लगाने के लिए वह दूसरे-तीसरे दिन भारतीय दूतावास कार्यालय जाती है। 50 से ज्यादा ई-मेल भी कर चुकी है, लेकिन संतोषजनक कोई जवाब नहीं मिला है।
दोनों एजेंट फरार
भाई राम नगीना ने बताया कि दिल्ली के रहने वाले सुमित और दुष्यंत के माध्यम से योगेंद्र रूस गया था। सुमित के पास योगेंद्र का एटीएम भी है। इस बारे में जब सुमित को यह पता चला कि परिजन उसकी तलाश कर रहे हैं वह ऑस्ट्रेलिया और दुष्यंत रूस भाग गया।
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सांसद से लेकर विदेश मंत्री तक लगाई गुहार
योंगेंद्र के परिजनों ने इस मामले में सांसद धर्मेंद्र यादव, भाजपा के पूर्व महासचिव संजय विनायक सहित विदेश मंत्री से भी गुहार लगाई, लेकिन कहीं कोई कामयाबी नहीं मिली।
सिक्योरिटी गार्ड की करनी थी नौकरी, भेज दिया युद्ध करने
योगेंद्र के परिजनों ने बताया कि उसे सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करने की बात कही गई थी, लेकिन वहां पहुंचने पर बताया कि उसे युद्ध करने की ट्रेनिंग दी जा रही है। जिसे वह करना नहीं चाहता है। वापस उसे अपने घर आना है।
फीस नहीं जमा हुई तो बेटी को बाहर बैठाया
योंगेंद्र की तीन बेटियां व एक बेटा है। बड़ी बेटी मुस्कान इंटर की बॉयोलॉजी की छात्रा है। वह शहर के एक स्कूल में पढ़ती है। मुस्कान ने बताया कि उसका प्रैक्टिकल था। लेकिन, फीस जमा नहीं होने से उसे शिक्षक ने बाहर बैठा दिया। काफी मिन्नतें करने पर वह प्रैक्टिकल दे पाई।
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