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कागजों में छाई हरियाली, मौके पर जमीन खाली

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पर्यावरण संरक्षण के नाम पर लाखों पौधे रोपे जाते हैं लेकिन संरक्षण के अभाव में पचहत्तर फीसदी पौधे नष्ट हो जाते हैं। ऐसे में वन विभाग के रिकार्ड में हरियाली तो छाई रहती है लेकिन मौके पर जमीन खाली नजर आता है। स्थिति यह है कि जिले महज 110 हेक्टेयर वन क्षेत्र है। वहीं हरियाली 0.6 फीसदी है।
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शासन के निर्देश पर महोत्सव मनाया गया लेकिन जिले में हरियाली नहीं आई। वन विभाग ने वर्तमान वित्तीय वर्ष में 5306000 पौधे रोपे थे। इनमें कितने सुरक्षित हैं और हरियाली कितनी बढ़ी, इसका कोई लेखा-जोखा विभाग के पास नहीं है। रोपे गए पौधे के आधार पर वन विभाग के कागजों में हरियाली है लेकिन हकीकत यह है कि हर वर्ष रोपे जाने वाले पौधों में 25 फीसदी भी सुरक्षित नहीं रहते हैं। जबकि पौधों की सुरक्षा के ट्री-गार्ड के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं। पौधरोपण के बाद पौधों को सुरक्षित रखने पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया जाता है। अगर रोपे गए पौधों में पचास फीसदी पौधे भी सुरक्षित हो गए होते तो भी जिले की हरियाली पर्याप्त होती। पर्यावरण संरक्षण के नाम पर हर साल पौधरोपण का लक्ष्य निर्धारित किया जाता है। लक्ष्य की पूर्ति के लिए सभी विभागों को दिशा-निर्देश दिया जाता है। शहर वानकी के तहत नगर पालिका और नगर पंचायतों की ओर से प्रतिवर्ष हजारों पौधे सड़कों के किनारे रोपित किए जाते हैं। पौधरोपण करते समय विभिन्न माध्यमों से इसका प्रचार तो किया जाता है लेकिन पौधों की सुरक्षा पर कोई ध्यान नहीं देता है। वन विभाग के अधिकारियों की मानें तो वन क्षेत्र बढ़ाने के लिए भूमि की मांग को लेकर कई बार प्रशासन से पत्राचार किया गया है लेकिन भूमि उपलब्ध नहीं हो सकी। विभाग का कहना है कि उनके पास भूमि ही नहीं है। इसकी वजह से वन क्षेत्र नहीं बढ़ रहा है।
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वर्ष लगाए गए पौधे
2013-14 300626 पौधे
2014-15 197201 पौधे
2015-16 357547 पौधे
2016-17 569480 पौधे
2017-18 259241 पौधे
2018-19 1650091 पौधे
2019-20 6240706 पौधे
2020-21 4351730 पौधे
2021-22 5306000 पौधे
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जनपद में कुल 110 हेक्टेयर वन क्षेत्र है। हमारे यहां भूमि की कमी है। इसे लेकर प्रशासन को पत्र लिखा गया लेकिन भूमि उपलब्ध नहीं हो सकी। वर्तमान समय में 0.6 फीसदी जनपद में हरियाली क्षेत्र है।-गंगा दत्त मिश्रा, डीएफओ, आजमगढ़।
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