आजमगढ़। विशेष सत्र न्यायाधीश विजय कुमार वर्मा की अदालत ने बृहस्पतिवार को 13 वर्ष पुराने हत्या के मुकदमे में पांच दोषियों को आजीवन कारावास और प्रत्येक को 67,750 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अदालत ने आदेश दिया कि जुर्माने की आधी राशि मृतक के वारिसों को दी जाए। वहीं, इसी प्रकरण से जुड़े क्रॉस केस में तीन दोषियों को सात-सात वर्ष के कारावास और 15,000 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई।
अभियोजन के अनुसार, वादी मुकदमा अजय उपाध्याय निवासी मुखलिसपुर थाना कप्तानगंज के चाचा देवी चरण 26 जून 2012 की सुबह साढ़े पांच बजे शौच के लिए जा रहे थे। उसी दौरान आबादी की जमीन को लेकर हुए विवाद में ब्रजेश उपाध्याय, रमेश उपाध्याय, जनार्दन, अखिलेश उपाध्याय, हृदय नारायण, विप्लव उर्फ बिन्दे ने उन्हें गाली-गलौज किया। मना करने पर आरोपियों ने लाठी-डंडों से उनकी पिटाई कर दी और रमेश ने कट्टे से फायरिंग भी की। बीच-बचाव करने पहुंचे अजय, पंकज और विजय को भी हमलावरों ने मारपीट कर घायल कर दिया। गंभीर चोट लगने से देवी चरण की मौत हो गई। पुलिस जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता ने आठ गवाहों को परीक्षित कराया।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने ब्रजेश उपाध्याय, रमेश उपाध्याय, जनार्दन, अखिलेश उपाध्याय और विप्लव उर्फ बिन्दे को आजीवन कारावास और अर्थदंड से दंडित किया। वहीं, आरोपी हृदय नारायण की अनुपस्थिति पर अदालत ने उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया।
अभियोजन कहानी के अनुसार, वादी मुकदमा बृजेश ने आरोप लगाया कि 26 जून 2012 की सुबह शौच के लिए जाते समय अजय, कमलेश, पंकज और नरेंद्र ने उन पर लाठी-डंडों से हमला कर फायरिंग की, जिससे रमेश घायल हो गया। पुलिस ने चारों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की, लेकिन मुकदमे के दौरान आरोपी कमलेश की मृत्यु हो गई। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता ने सात गवाहों को परीक्षित कराया। सुनवाई के बाद अदालत ने दाषी अजय, पंकज और नरेंद्र को सात-सात वर्ष का कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता ने सात गवाहों को परीक्षित कराया। सुनवाई के बाद अदालत ने आरोपी अजय, पंकज और नरेंद्र को सात-सात वर्ष का कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई।