स्थानीय ब्लाक के साकीपुर गांव में पंचायत भवन के निर्माण में वित्तीय अनियमितता पाई गई है। जांच में यह बात सामने आई है कि पंचायत भवन के निर्माण में पूर्व प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी की ओर से गुणवत्ताविहीन सामग्री का इस्तेमाल कर छह लाख 99 हजार 920 रुपये की वित्तीय अनियमितता की गई है। संबंधित के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। जांच में अब तकनीकी सहायक के लिप्त होने की बात सामने आने पर जिलाधिकारी के निर्देश पर डीपीआरओ ने संबंधित थाने में उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश दिया है।
डीपीआरओ लालजी दुबे ने बताया कि साकीपुर गांव में पंचायत भवन का निर्माण चल रहा है। कुछ दिन पूर्व गांव के अभय तिवारी ने डीएम को पत्र लिखकर पंचायत भवन निर्माण की जांच कराने की मांग की थी। आरोप था कि पंचायत भवन में कार्यदायी संस्था की ओर से घटिया सामग्री इस्तेमाल में लाई गई है। डीएम के निर्देश पर एसडीएम सदर, डीपीआरओ लालजी दुबे, एडीओ पंचायत रानी की सराय और लोकनिर्माण खंड पांच के जेई साकीपुर गांव पहुंचे। एसडीएम के निर्देश पर निर्माण में प्रयुक्त ईंट को तोड़कर देखा गया। इसके अलावा एसडीएम ने दरवाजे के लिए बने पिलर को तोड़वाकर देखा। इसमें सिर्फ एक सूत का सरिया मिला। एसडीएम के निर्देश पर टीम ने पिलर को काटकर नमूना लिया था। जांच में गुणवत्ता विहीन सामग्री का प्रयोग होना पाया गया। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि पंचायत भवन निर्माण में घटिया किस्म के सामग्री प्रयोग कर 699920.00 रुपये की वित्तीय अनियमितता की गई है। इस घोर लापरवाही को लेकर पूर्व प्रधान शशिकला तिवारी और ग्राम पंचायत अधिकारी सतीश सिंह के विरुद्घ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। अब जांच में तकनीकी सहायक सुशील कुमार चतुर्वेदी भी दोषी पाए गए हैं। डीएम अमृत त्रिपाठी के निर्देश पर डीपीआरओ ने तकनीकी सहायक के विरुद्घ रानी की सराय थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए निर्देश जारी किया है।
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पंचायत भवन के निर्माण में घटिया सामग्री का प्रयोग किया गया है। इसमें छह लाख 99 हजार 920 रुपये की वित्तीय अनियमितता पाई गई है। पूर्व प्रधान व ग्राम पंचायत अधिकारी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हो चुकी है। अब तकनीकी सहायक भी दोषी पाए गए हैं। उनके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कराने के लिए निर्देश दिया गया है।-लालजी दुबे, जिला पंचायत राज अधिकारी।