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हारकर भी जमाली ने सपा से हिसाब किया बराबर

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जिस आजमगढ़ को राजनीति के धुरंधर मुलायम सिंह यादव ने सपा के लिए एक दुर्ग के रूप में संभाल कर रखा था, आखिर वह ध्वस्त हो गया। सपा के इस दुर्ग को ध्वस्त करने में बसपा प्रत्याशी शाह आलम गुड्डू जमाली का बड़ा योगदान रहा। भले ही जमाली चुनाव हार गए, लेकिन यहां चर्चाओं में बने हुए हैं। जमाली ने सपा से विधानसभा चुनाव का हिसाब बराबर कर लिया है। उन्होंने सपा के गढ़ को ढहाने की जो नींव रखी, उसका फायदा उन्हें नहीं मिला, बल्कि निरहुआ ने उस नींव के सहारे आजमगढ़ का सरताज बनने का गौरव हासिल किया।
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उल्लेखनीय है कि विधानसभा चुनाव से पहले बसपा विधानमंडल के नेता गुड्डू जमाली ने पार्टी छोड़ दी थी। उनको उम्मीद थी कि समाजवादी पार्टी उन्हें मुबारकपुर विधानसभा सीट से टिकट देगी, लेकिन अंतिम समय में सपा ने उन्हें झटका दे दिया। इसके बाद वह एआईएमआईएम के टिकट से मैदान में उतरे, लेकिन जिले में चली सपा की आंधी में वह पराजित हो गए। इसके बाद उनके मन में सपा के प्रति खलिश उत्पन्न हो गई। जब सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के लोकसभा सीट से इस्तीफा देने से उपचुनाव के आसार बने तो बसपा सुप्रीमो मायावती को गुड्डू जमाली बेहतर प्रत्याशी लगे और उन्हें बुलावा भेजा। आखिरकार जमाली भी सपा से पुराना हिसाब बराबर करने के लिए बसपा के टिकट पर मैदान में उतर गए और जीत के लिए जमकर मेहनत की।
इस चुनाव में जीत पाने वाले निरहुआ की जीत इस लिहाज से भी बड़ी है कि, उनके खिलाफ एक तरफ मुलायम परिवार से धर्मेंद्र यादव चुनाव मैदान में थे, जो बदायूं से दो बार सांसद रह चुके हैं। दूसरी तरफ बसपा के शाह आलम गुड्डू जमाली, जो दो बार मुबारकपुर विधानसभा से विधायक रह चुके हैं। निरहुआ की तुलना में दोनों सियासत के महारथी ही माने जाएंगे। लेकिन जैसा अनुमान था, अगर सपा और बसपा दोनों मैदान में उतरते हैं तो इसका फायदा भाजपा को मिल सकता है। हुआ भी वही। बसपा मुस्लिम मतदाताओं में सेंधमारी करते हुए कड़ा मुकाबला कर रही थी। दूसरी तरफ भाजपा के परंपरागत वोटर उसके साथ मजबूती से खड़े थे। तीसरी ओर मुस्लिम मतदाताओं के छिटकने से सपा प्रत्याशी की साइकिल की रफ्तार धीमी पड़ गई। अंतत: साइकिल थमी और कमल खिल गया।
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हम चुनाव हारे हैं इसे हम स्वीकार करते हैं, लेकिन 2024 में हम फिर मैदान में होंगे और चुनाव जीतेंगे। हमें लगता है कि हमारी मेहनत में ही कोई कमी रह गई है। मौसम भी प्रतिकूल था फिर भी हमने हर गांव तक जाने का प्रयास किया। रही बात हमारी वजह से भाजपा के जीतने की तो हम किसी को जिताने के लिए नहीं बल्कि खुद जीतने के लिए चुनाव लड़े थे।
- शाह आलम गुड्डू जमाली, बसपा प्रत्याशी
लोकसभा उपचुनाव में जो परिणाम आया है वह उम्मीद के विपरीत है। हमने चुनाव प्रचार में कोई कमी नहीं रखी, लेकिन प्रशासन के साथ बसपा और भाजपा का जो गठजोड़ था हम उसके चलते चुनाव हारे। बसपा प्रत्याशी द्वारा हमारे मतदाताओं को बरगलाया गया। प्रशासन द्वारा हमारे कार्यकर्ताओं को धमकाया गया। लगभग 20 की संख्या में कार्यकर्ताओं को प्रशासन ने उठा लिया, जिसकी वजह से हमें चुनाव में हार मिली।
- हवलदार यादव, सपा जिलाध्यक्ष
इस जीत के लिए हम जनपद की जनता का आभार व्यक्त करते हैं। निश्चित रूप से बसपा प्रत्याशी ने अच्छी लड़ाई लड़ी, जिसका फायदा मिला। लेकिन उसकी वजह से हम चुनाव नहीं जीते बल्कि इस बार जनपद की जनता ने मन बना लिया था कि हमें आजमगढ़ में कमल खिलाना है। जिससे हमें चुनाव में जीत मिली।
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- अजय सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष
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