शहर की शायद ही कोई ऐसी सड़क बची हो, जहां अतिक्रमण की समस्या न हो। मुख्य मार्गों से लेकर मोहल्लों की गलियों तक फुटपाथ और सड़क किनारे का बड़ा हिस्सा अस्थायी कब्जों और दुकानों के सामान से घिरा हुआ है।
अतिक्रमण के कारण सड़कें सिकुड़ गई हैं, जिससे यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है और राहगीरों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
नगर के प्रमुख बाजारों में कई दुकानदारों ने नालियों पर पटिया डालकर उन्हें अपने उपयोग में ले लिया है। इसके आगे तक सामान सजाकर बिक्री की जा रही है। खरीदारी के लिए आने वाले लोग भी अपने वाहन दुकानों के सामने ही खड़े कर देते हैं, जिससे सड़क की चौड़ाई और कम हो जाती है।
नतीजतन, दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है और वाहन चालकों को निकलने में कठिनाई होती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर की कई सड़कों का चौड़ीकरण तो किया गया, लेकिन अतिक्रमण के कारण उसका लाभ आम लोगों को नहीं मिल पा रहा है। यदि कोई व्यक्ति सड़क पर फैले सामान का विरोध करता है तो कई बार विवाद की स्थिति भी बन जाती है।
अतिक्रमण का असर नगर की सफाई व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। नालियों पर कब्जा होने के कारण सफाई कर्मियों को नियमित सफाई करने में दिक्कत होती है।
कई स्थानों पर नालियां जाम रहने से गंदा पानी जमा रहता है और बदबू फैलती है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बना रहता है। शहर के चकला पहाड़पुर, तकिया, मुकेरीगंज और फरासटोला मोहल्लों में सड़कों पर अतिक्रमण है, जिससे राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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फुटपाथ की सीमा तय की जाएगी : एसपी ट्रैफिक
एसपी ट्रैफिक पंकज कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि शहर को जाम से निजात दिलाने के लिए चिह्नांकन अभियान चलाया जाएगा। सड़क और फुटपाथ की सीमा (लक्ष्मण रेखा) तय कर दुकानदारों को उसी सीमा के भीतर व्यापार करने के निर्देश दिए जाएंगे। निर्धारित सीमा से बाहर अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ अभियान चलाकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।