आजमगढ़ जनपद में रेल सुविधाओं के विकास के लिए लड़ी लंबी लड़ाई लड़ने वाले डॉ. मुहम्मद तैय्यब आजमी ने शनिवार शाम दुनिया को अलविदा कह दिया। जिले में धरने के पर्याय माने जाने वाले डा. आजमी मंडलीय रेल सलाहकार समिति के पूर्व सदस्य भी थे।
बिलरियागंज नगर पंचायत निवासी डॉ. मुहम्मद तैय्यब आजमी को शायद ही कोई व्यक्ति होगा जो कलेक्ट्रेट कचहरी जाता हो और न जानता हो। उनका पूरा जीवन संघर्षों में ही बीता। जनपद में रेलवे सुविधाओं के विस्तार को लेकर उन्होंने एक हजार से अधिक दिनों तक धरना दिया था। आजमगढ़ से कोलकाता, मुंबई, दिल्ली और लखनऊ तक ट्रेनें चलवाने के लिए उन्होंने लंबा संघर्ष किया।
वह अकेले ही दरी बिछाकर रिक्शा स्टैंड पर बैठ जाते। कोई आए या न आए वह धरने पर बैठना नहीं छोड़ते थे। कोई सुनने वाला न भी हो तो भी माइक के जरिए अपनी मांगों को शासन और प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास करते थे। धरने के बाद प्रधानमंत्री, रेल मंत्री, राज्यपाल और राष्ट्रपति तक अपनी आवाज को पहुंचाने के लिए वे प्रशासन को ज्ञापन भी नियमित देते थे।
उन्होंने कभी किसी की परवाह नहीं की वह हमेशा अपने उसूलों पर चलते रहे। उनके निधन पर सोशल मीडिया से लेकर हर तरफ लोगों ने शोक संवेदना व्यक्त की। आजमगढ़ विकास संघर्ष समिति के सचिव एसके सत्येन, विश्वविद्यालय अभियान के संयोजक डा. सुजीत भूषण, छात्रनेता मिर्जाशाने आलम बेग आदि ने इसे अपूरणीय क्षति बताते शोक संवेदना जताई है।