आजमगढ़। जिला अस्पताल में संसाधनों की कोई कमी नहीं है सीटी स्कैन, डिजिटल एक्स-रे के साथ ही पैथोलॉजी पूरी तरह से काम कर रहे हैं, लेकिन मैन पावर की कमी अस्पताल प्रशासन के लिए परेशानी का सबब बनी हुई। न्यूरो सर्जन व प्लास्टिक सर्जन की तैनाती न होने से गंभीर मरीजों को हायर सेंटर रेफर करना जिला अस्पताल प्रशासन की मजबूरी बन कर रह गया है। वही कहने को तो अस्पताल परिसर में ट्रामा सेंटर भी स्थापित है, लेकिन आज तक इसमें मानक के अनुरूप डॉक्टरों अन्य कर्मियों की तैनाती नहीं हो सकी है।
जिला अस्पताल को मंडलीय अस्पताल का दर्जा प्राप्त है। मरीजों को बेहतर इलाज की सुविधा देने के लिए सरकार यहां दो-दो सीटी स्कैन मशीन स्थापित करवाने के साथ ही बड़ी पैथलॉजी, डिजीटल एक्स रे, नार्मल एक्स-रे आदि समेत अन्य विभिन्न प्रकार के जांच की सुविधा उपलब्ध करा रखा है। संसाधनों के मामले में अस्पताल प्रशासन की व्यवस्था वर्तमान में काफी बेहतर है लेकिन मैन पॉवर की कमी के चलते अस्पताल प्रशासन को दुश्वारियां झेलनी पड़ रही है।
न्यूरो सर्जन की जिला अस्पताल में अब तक तैनाती नहीं हुई है तो वहीं प्लास्टिक सर्जन डॉ. सुबास सिंह के पद से इस्तीफा दे दिए जाने के बाद से अब तक किसी और की यहां तैनाती नहीं हो सकी है। इतना ही नहीं वार्ड ब्वाय, नर्स समेत मंडलीय अस्पताल के कई विभागों में स्टाफ की भी कमी है। मानक के अनुरूप फीजिशियन भी नहीं है तो वहीं इमरजेंसी के लिए ईएमओ का पद भी अभी रिक्त चल रहा है। अस्पताल परिसर में सड़क हादसों में घायल होने वालों को बेहतर इलाज के लिए ट्रामा सेंटर भी अखिलेश यादव की सरकार में स्थापित हुआ था, लेकिन दस साल का लंबा समय होने के बाद भी इसे आज तक ट्रामा सेंटर के रुप में स्थापित नहीं किया जा सका है। डॉक्टर व स्टाफ मानक के अनुरूप यहां तैनात नहीं है। जिसका परिणाम है कि अस्पताल प्रशासन हड्डी रोग विभाग को यहां बैठा कर ट्रामा सेंटर का संचालन कर रहा है। इस मामले में जिला अस्पताल के प्रभारी एसआईसी डॉ. अनूप कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि न्यूरो सर्जन, प्लास्टिक सर्जन समेत अन्य जरूरी मानव संसाधन के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। अस्पताल में मौजूद सभी मशीने दुरूस्त है और पूरी क्षमता से काम कर रही है। मैन पॉवर की कमी ही थोड़ी बहुत दिक्कत कर रही है। जिसमें सुधार को लेकर लगातार शासन से वार्ता चल रही है।