राष्ट्रीय क्षितिज की बात की जाए तो आजमगढ़ के प्रख्यात शायर रहे स्व. कैफी आजमी की पुत्री शबाना आजमी ने फिल्मी दुनिया में अपने उत्कृष्ट और गंभीर किरदारों से अपना लोहा मनवा चुकीं है। अपनी सफलता का परचम गढ़ने के बाद वे आज भी अपने पैतृक जनपद को नहीं भूलीं हैं, उन्होंने अपने गांव-गिरांव की महिलाओं के हाथों को मजबूत बनाने के लिए अपने मेजवां स्थित पैतृक आवास पर मेजवां वेलफेयर सोसाइटी की स्थापना किया।
इस बावत सोसाइटी के प्रबंधक आशुतोष त्रिपाठी ने बताया कि आज इस सोसाइटी से जुड़ी 800 महिलाएं खुद को स्वावलंबी बनाकर अपने जीवन को संवार रही हैं। आज यह सोसाइटी 11 जिलों में काम करते हुए महिलाओं केे उत्थान के लिए बड़ा काम कर रही है।
आजमगढ़ के हीरापट्टी निवासिनी स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. स्वास्ति सिंह ने चिकित्सा के क्षेत्र में बड़ा मुकाम हासिल किया है। उन्होंने बड़े महानगरों का रूख न करते हुए आजमगढ़ में ही चिकित्सकीय क्षेत्र को नया आयाम दिया है। महानगरों का रुख छोड़कर आज भी अपने आजमगढ़ वासियों की सेवा कर रही हैं।
मेरी बेटी-मेरी पहचान, बेटा-बेटी एक समान जैसे संदेश के साथ रैदोपुर की रहने वाली बेटी ममता पंडित जिले का नाम रोशन कर रही हैं। कड़ी मेहनत व संघर्ष के बूते कामयाबी की नई इबारत लिखने के साथ राष्ट्रीय फलक पर बड़ी पहचान बनाई हैं। रंगकर्मी ममता पंडित ने सामाजिक रूढ़िवादिता से ऊपर उठकर ऐसे क्षेत्र में कैरियर बनाने की सोची जिसमें बड़े घर के लोग कदम रखने से डरते हैं। लेकिन ममता के इस कार्य में उनके पति अभिषेक पंडित ने भी उनका पूरा साथ दिया। आज ममता का नाम दिग्गज रंगकर्मियों में लिया जाता है।