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डॉटर्स डे: अंधेरी आंखों से समाज में उजियारा फैला रही आजमगढ़ की विभा गोयल, युवतियों के लिए बनी नजीर

Sun, 26 Sep 2021 05:18 PM IST
उत्पल कांत अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़

सार

आजमगढ़ की  विभा गोयल ने नेत्रहीन होते हुए भी  समाज में अपना एक अलग स्थान बनाया है। डॉटर्स डे के अवसर पर विभा गोयल उन युवतियों के लिए एक नजीर हैं जो किन्हीं कारणों से अपना लक्ष्य नहीं प्राप्त नहीं कर पातीं। 
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न्यू कला केंद्र की संस्थापिका विभा गोयल - फोटो : सोशल मीडिया।
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विस्तार
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आजमगढ़ के सब्जी मंडी चौराहा स्थित न्यू कला केंद्र की संस्थापिका विभा गोयल दोनों आखों से देख नहीं सकती हैं। इसके बावजूद विभा गोयल ने अपने कड़ी मेहनत व संघर्षों से अपनी एक अलग पहचान बनाई है। डॉटर्स डे के अवसर पर विभा उन युवतियों के लिए एक नजीर हैं जो किन्हीं कारणों से अपना लक्ष्य नहीं प्राप्त नहीं कर पातीं। आज विभा गोयल अपने पैरों पर खड़ी होने के साथ दूसरों को भी आत्मनिर्भर बना रही हैं।  

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नेत्रहीन होते हुए भी विभा गोयल ने समाज में अपना एक अलग स्थान बनाया है। उन्होंने कभी भी अपनी इस कमजोरी को आड़े नहीं आने दिया। आज बड़ी कुशलता से अच्छे से अच्छे डिजाइन बना लेती हैं। क्राफ्ट के सामानों को तैयार करने में कोई उनका हाथ नहीं पकड़ सकता है। अपनी इस कला के दम पर उन्होंने अपने परिवार को संभाला।

कला केंद्र के ऑफिस में प्रतिदिन ढोलक, डांस, सिलाई, कढ़ाई और बुनाई सीखने के लिए दर्जनों महिलाएं और बच्चे आते हैं। जिसके माध्यम से वह महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का कार्य भी करती हैं। नौ साल की उम्र में आखों की रोशनी खोने वाली विभा ने 1999 में न्यू कला केंद्र समिति नाम से एक संस्था बनायी। जिसमें विभा आज आज़मगढ़ की महिलाओं को सिलाई, बुनाई, कढ़ाई, डांस, साथ ही शहर में कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी करवाती है। 

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शबाना आजमी की सोसाइटी ने 800 महिलाओं के जीवन में भरा रंग

राष्ट्रीय क्षितिज की बात की जाए तो आजमगढ़ के प्रख्यात शायर रहे स्व. कैफी आजमी की पुत्री शबाना आजमी ने फिल्मी दुनिया में अपने उत्कृष्ट और गंभीर किरदारों से अपना लोहा मनवा चुकीं है। अपनी सफलता का परचम गढ़ने के बाद वे आज भी अपने पैतृक जनपद को नहीं भूलीं हैं, उन्होंने अपने गांव-गिरांव की महिलाओं के हाथों को मजबूत बनाने के लिए अपने मेजवां स्थित पैतृक आवास पर मेजवां वेलफेयर सोसाइटी की स्थापना किया।

इस बावत सोसाइटी के प्रबंधक आशुतोष त्रिपाठी ने बताया कि आज इस सोसाइटी से जुड़ी 800 महिलाएं खुद को स्वावलंबी बनाकर अपने जीवन को संवार रही हैं। आज यह सोसाइटी 11 जिलों में काम करते हुए महिलाओं केे उत्थान के लिए बड़ा काम कर रही है।

महानगरों का रूख छोड़ जिले को दे रहीं सेवा

आजमगढ़ के हीरापट्टी निवासिनी स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. स्वास्ति सिंह ने चिकित्सा के क्षेत्र में बड़ा मुकाम हासिल किया है। उन्होंने बड़े महानगरों का रूख न करते हुए आजमगढ़ में ही चिकित्सकीय क्षेत्र को नया आयाम दिया है। महानगरों का रुख छोड़कर आज भी अपने आजमगढ़ वासियों की सेवा कर रही हैं। 
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दिग्गज रंगकर्मियों में ममता पंडित का भी नाम

मेरी बेटी-मेरी पहचान, बेटा-बेटी एक समान जैसे संदेश के साथ रैदोपुर की रहने वाली बेटी ममता पंडित जिले का नाम रोशन कर रही हैं। कड़ी मेहनत व संघर्ष के बूते कामयाबी की नई इबारत लिखने के साथ राष्ट्रीय फलक पर बड़ी पहचान बनाई हैं। रंगकर्मी ममता पंडित ने सामाजिक रूढ़िवादिता से ऊपर उठकर ऐसे क्षेत्र में कैरियर बनाने की सोची जिसमें बड़े घर के लोग कदम रखने से डरते हैं। लेकिन ममता के इस कार्य में उनके पति अभिषेक पंडित ने भी उनका पूरा साथ दिया। आज ममता का नाम दिग्गज रंगकर्मियों में लिया जाता है।  
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