मंडलीय जिला अस्पताल में चिकित्सक को दिखाने के लिए उमड़ी भीड़। संवाद
बलरामपुर। होली के त्योहार में रंगों की मस्ती सभी को आकर्षित करती है, लेकिन बाजार में बिक रहे केमिकल युक्त रंग (सिंथेटिक कलर्स) सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं। इनमें लेड ऑक्साइड, मरकरी, कॉपर सल्फेट, क्रोमियम और एस्बेस्टोस जैसे जहरीले तत्व पाए जाते हैं, जो आंखों में जलन, त्वचा संक्रमण, एलर्जी और गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। डॉक्टरों ने लोगों से हर्बल और प्राकृतिक रंगों का प्रयोग करने की अपील की है। मंडलीय जिला अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. रजनीश कुमार सेठ ने बताया कि केमिकल रंग आंखों में जाने पर तुरंत जलन, लालिमा, सूजन और पानी आना शुरू हो जाता है। कई मामलों में कॉर्नियल अब्रेशन, केमिकल कंजंक्टिवाइटिस, कॉर्नियल अल्सर तक की समस्या हो सकती है। कुछ रंगों में मौजूद एसिडिक और क्षारीय तत्व आंख की गहरी परतों को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिससे समय पर इलाज न मिलने पर दृष्टि हानि का खतरा रहता है। डॉ. रजनीश कुमार से सलाह दी कि होली खेलते समय चश्मा या गॉगल्स पहनें, रंग से भरे गुब्बारे न मारें और यदि आंखों में रंग चला जाए तो तुरंत साफ ठंडे पानी से 15–20 मिनट तक आंख धोएं, रगड़ें नहीं और स्वयं दवा न डालें।
त्वचा पर एलर्जी व संक्रमण का खतरा : डॉ. पूनम कुमारी
बलरामपुर। जिला मंडलीय चिकित्सालय की चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. पूनम कुमारी ने बताया कि केमिकल रंगों से कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस, खुजली, जलन, लाल चकत्ते, सूखापन, एक्जिमा और स्किन इंफेक्शन हो सकता है। इनमें मौजूद भारी धातुएं लंबे समय में पिगमेंटेशन और स्किन कैंसर का जोखिम भी बढ़ा सकती हैं। उन्होंने बचाव के लिए होली खेलने से पहले नारियल तेल या मॉइश्चराइजर लगाने, होली के बाद ठंडे पानी और न्यूट्रल साबुन से नहाने और समस्या होने पर तुरंत त्वचा विशेषज्ञ से संपर्क करने की सलाह दी। चिकित्सकों ने कहा कि सुरक्षित और स्वस्थ होली के लिए हर्बल व प्राकृतिक रंगों का ही उपयोग करें और सेहत के साथ कोई समझौता न करें।