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लगते ही खराब हो गई थी आधी से ज्यादा लाइटें

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आजमगढ़। जनपद की नवसृजित नगर पंचायत माहुल में करोड़ों रुपये खर्च कर लगाई गई लाइटों में घोटाले का खेल ईओ और लिपिक और ठेकेदार की तिकड़ी की ओर से की गई। वर्ष 2016-17 में लगभग दो करोड़ की लागत से 250 लाइटें लगाई गई थीं। कुछ नामी कंपनी की लाइटों के साथ सभी लोकल लगाकर खेल किया गया था। नये चेयरमैन ने पद संभालने के बाद 125 से ज्यादा लाइटें दुरुस्त कराई थीं। पहले भी मामले की शिकायत की गई थी। तत्कालीन जिलाधिकारी ने ईओ और लिपिक को तो हटा दिया, लेकिन जांच के नाम पर लीपापोती कर मामले को दबा दिया गया। फिलहाल जांच टीम गठित होने से हड़कंप मचा है।
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फूलपुर तहसील के माहुल कस्बे को सपा शासनकाल में नई नगर पंचायत घोषित किया गया था। चुनाव न होने के बाद भी प्रशासक की ओर से नगर पंचायत के हिसाब से माहुल में विकास कराए जाने लगे। वर्ष 2016-17 में लगभघ दो करोड़ों की लागत से 250 लाइटें लगवाई गई थी। लाइटों के लगवाने के दो माह बाद ही अधिकतर लाइटें खराब हो गईं। इसकी शिकायत भी कमिश्नर से की गई। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। खराब लाइटें नगर पंचायत में पड़ी सड़ रही थीं। इस बीच निकाय चुनाव के बाद चेयरमैन के रूप में बदरे आलम आसीन हुए। 125 से ज्यादा लाइटों की मरम्मत उनकी ओर से कराई गई। तत्कालीन जिलाधिकारी सीबी सिंह से मामले की शिकायत हुई तो उन्होंने ईओ को रिलीव करने के साथ ही लिपिक की संबद्धता खत्म कर दी। इसके साथ ही फूलपुर नगर पंचायत के नजदीक होने के कारण वहां कर्मचारियों को संबद्ध कर दिया, लेकिन जांच के नाम पर मामले में लीपापोती कर दी गई। सूत्रों की मानें तो खरीद संबंधी फाइलों में नामी कंपनी से लाइटों की खरीद दिखाई गई है। यदि लाइटें नामी कंपनी की होती को निश्चित समय तक वारंटी होती। कंपनी को इसे बदलना होता। इसे बदलने और मरम्मत कराने की नौबत नहीं आती। कहा तो यहा तक जा रहा है कि चंद लाइटें ही नामी कंपनी की थी। शेष लोकल लाइटें लगवाकर करोड़ों का खेल कर दिया गया।

गाजीपुर की फर्म को मिला था ठेका
माहुल में लाइटों के लगाने का ठेका गाजीपुर के एक फर्म को मिला था। सूत्रों की मानें तो ठेकेदार ने भी पिछले कुछ सालों में काफी अच्छी प्रगति की है। स्थानीय लोगों की ओर से सीधे ठेकेदार पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो नगर पंचायत की सीमा से बाहर जाकर लाइटें लगाई गई हैंष अनाधिकृत फर्म से चाइनीज लाइटों की खरीद की गई है।
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सड़कों पर लगी लाइटें, मोहल्ले अंधेरे में
अंबारी। स्थानीय लोगों की माने तो लाइटों का अधिकतर प्रयोग सिर्फ सड़कों पर किया गया है। मोहल्लों में अभी तक अंधेरा पसरा रहता है। इसके साथ ही स्थानीय लोगों की ओर से लाइटों की संख्या पर भी सवाल उठाया जा रहा है। कहा जा रहा है कि इतनी लाइटें लगतीं तो पूरी नगर पंचायत में उजाला हो जाता। वहीं, नाम न छापने की शर्त पर लोगों ने बताया कि लाइटों को लगाने में काफी भेदभाव किया गया है। हिंदू जनसंख्या वाले वार्डों में ध्यान नहीं दिया गया है।

पेयजल आदि का कोई कार्य नहीं
नवसृजित नगर पंचायत माहुल में सिर्फ उक्त अवधि में इतनी बड़ी मात्रा में राज्य वित्त की धनराशि का प्रयोग सिर्फ खरीदारी में की गई। मूलभूत नागरिक सुविधाओं की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया गया। सफाई, पेयजल, और कार्यालय की स्थापना संबंधी कोई कार्य नहीं हुआ।

हटाने के बाद फिर किया संबद्धता का प्रयास
पिछली शिकायत के बाद तत्कालीन जिलाधकिारी ईओ को रिलीव करने के साथ ही लिपिक आदि की संबद्धता को खत्म कर दिया था। इसके बाद भी इन कर्मचारियों को यहां का इतना मोह था कि फिर से संबद्धता के लिए खूब प्रयास किया गया। कोशिश फिर से मनमानी खरीद और मनचाहे आउटसोर्सिंग के कर्मचारियों को नियुक्ति की थी, लेकिन ये फेल हो गई।

ईओ की तैनाती की कोशिश से खुला मामला
पिछली शिकायत के बाद घोटाले का मामला दब गया था। इस दौरान एक ईओ की विशेष स्थान तैनाती की कोशिश में पूरा मामला फिर निकल कर सामने आ गया। साक्ष्य भाजपाइयों के हाथ लगने के बाद उन्होंने मामले की फिर से शिकायत करने का बाद मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की।

घोटाले की बात सही है। मैंने कार्यभार संभालने के बाद 125 से ज्यादा लाइटें सही कराई हैं। जांच हो रही है, उम्मीद है सबकुछ खुलकर सामने आ जाएगा। - बदरे आलम, नगर पंचायत अध्यक्ष

इसकी शिकायत मैंने पहले ही कमिश्नर से की थी। नगर पंचायत की सीमा से बाहर लाइटें लगाई गई हैं। अनाधिकृत फर्म से चाइनीज लाइटें खरीदी गई हैं। - रमाकांत मिश्र, वरिष्ठ भाजपा नेता

जिलाधिकारी को शिकायत मिलने के बाद जांच कमेटी का गठन किया जा चुका है। कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद जो भी इसमें दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - नरेंद्र सिंह, एडीएम प्रशासन।
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