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10 किमी के दायरे में नहीं दें पाए 0.8 हेक्टेयर

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आजमगढ़। शहर के स्वच्छ, सुंदर और प्रदूषण से मुक्त बनाने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से सूबे के 25 जनपदों में फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के लिए घोषणा की गई थी। इसमें आजमगढ़ भी शामिल था। इसके लिए जिला प्रशासन से 8000 वर्ग मीटर (0.8 हेक्टेयर) भूमि की मांग शहरी क्षेत्र में की गई थी। जलनिगम की ओर से उक्त 25 जनपदों के लिए लखनऊ से निविदा भी आमंत्रित कर दी गई थी। इसके बाद भी जिला प्रशासन शहरी क्षेत्र के 10 किमी के दायरे में भूमि उपलब्ध करा पाने में नाकाम रहा। इससे निविदा भी फंसी हुई है। भूमि न मिलने की दशा में इसे निरस्त करना पड़ सकता है। जल निगम की ओर से एक बार फिर भूमि उपलब्ध कराने की मांग की गई है। इससे पहले भूमि की ही कमी से एसटीपी की भी निविदा निरस्त की जा चुकी है।
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शहरों में गंदगी के खिलाफ मुहिम चला रही सरकार की योजना सीवेज सिस्टम सुधारना है। केन्द्र सरकार की पहल के बाद फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापना की कवायद शुरू हुई थी। पिछले साल केन्द्र सरकार के फैसले को प्रदेश सरकार ने लागू करने की तैयारी की थी। अमृत योजना के तहत सूबे के 25 जनपदों में फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने की घोषणा की गई थी। इस प्लांट के जरिए शौचालयों के टैंक से निकलने वाली गाद से जैविक खाद एवं गैस बनाने की योजना बनाई गई थी। अभी तक शहरी क्षेत्र के घरों के शौचालयों से निकलने वाले गाद को पालिका की ओर से सड़कों के किनारे खुले में फेंक दिया जाता है। इससे बड़े पैमाने पर पर्यावरण प्रदूषण भी फैलता है। प्लांट के लिए शासन की ओर से चयनित जनपदों से शहरी क्षेत्र में आवश्यक 8000 वर्ग मीटर भूमि की मांग की गई थी। बीते एक साल के दौरान जिला प्रसासन ये भूमि उपलब्ध कराने में नाकाम रहा है। विभागीय जानकारों की मानें तो ये प्लांट पालिका क्षेत्र के 10 किमी के दायरे लगाया जा सकता है। तत्कालीन जिलाधिकारी की ओर से भूमि उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी एडीएम प्रशासन को दी गई थी। बाद में शहरी क्षेत्र में भूमि उपलब्ध ही होने से इंकार कर दिया गया था। जबकि इस योजना के बाद शहर के बगल में मोहब्बतपुर विवि के लिए 38 एकड़ से ज्यादा भूमि उपलब्ध कराई गई है।
जल निगम की ओर से सभी जनपदों के लिए लखनऊ में एक साथ निविदा भी योजना के लिए कराई जा चुकी है। अब निविदा में भूमि के दस्तावेज अपलोड किए जाने है। जलनिगम की ओर से एक बार फिर जिला प्रशासन से आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने की मांग की गई है। अन्यथा की स्थिति
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में निविदा निरस्त करनी पड़ सकती है।
जैविक खाद वरदान के कम नहीं
कृषि विभाग के जानकारों की मानें तो शौचालयों की गाद से बनने वाले जैविक खाद किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। रसायनिक खादों से भूमि की उर्वरता प्रभावित होती है। वहीं यह जैविक खाद किसानों के लिए रसायनिक खाद से 20 गुना ज्यादा लाभकारी होती है। इसके साथ ही खेती की लागत भी कम आती है। आजकल किसानों को जैविक खाद के प्रयोग के लिए प्रेरित भी किया जा रहा है।
एसटीपी की पहले निरस्त हो चुकी है निविदा
शहर में जलनिगम की ओर से सीवरेज लाइन तो बिछा दी गई है, लेकिन अभी भी उसे एसटीपी की स्थापना के लिए भूमि की तलाश है। इसके कारण शहर की पूरी गंदगी बिना ट्रीट किए तमसा नदी में गिराई जा रही है। एसटीपी के लिए जलनिगम ने पटखौली में एक प्रस्ताव भी बनाया था। शासन की ओर से 42 करोड़ के प्रस्ताव को मंजूरी भी दी गई, लेकिन भूमि कम होने से यहां की भी निविदा निरस्त कर दी गई। इसके बाद भी एसटीपी के लिए अभी तक भूमि नहीं मिल पाई है।
एसटीपी के लिए लखनऊ में निविदा निकाली जा चुकी है। इसमें भूमि के दस्तावेज अपलोड किए जाने हैं। इसके लिए उच्चाधिकारियों के निर्देश पर भूमि उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन से फिर मांग की गई है।
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रणविजय सिंह, एक्सईएन जलनिगम
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