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UP Crime: किशोरी के अपहरण व दुष्कर्म के दोषी को सात साल की सजा, घटना के 10 साल बाद आया फैसला

Fri, 03 Apr 2026 08:46 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़।

सार

Azamgarh News: आजमगढ़ जिले में नाबालिग से अपहरण व दुष्कर्म के मामले में आरोपी को सात वर्ष की सजा सुनाई गई। ये फैसला पॉक्सो कोर्ट ने सुनाया। साथ ही 12 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला प्रिंट/एजेंसी
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विस्तार
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आजमगढ़ जिले में नाबालिग किशोरी के अपहरण तथा दुष्कर्म के मुकदमे में सुनवाई पूरी करने के बाद पॉक्सो कोर्ट के जज संतोष कुमार यादव ने शुक्रवार को दोषी को सात वर्ष के सश्रम कारावास तथा 12 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।

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ये है पूरा मामला
अभियोजन पक्ष के अनुसार निजामाबाद थाना क्षेत्र के एक गांव की 16 वर्षीय पीड़िता 25 जुलाई 2015 को पढ़ने के लिए स्कूल गई थी। वहीं से आरोपी आजम उर्फ मोनिस निवासी फरिहा थाना निजामाबाद उसे बहला-फुसलाकर भगा ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। मामले में पुलिस ने जांच पूरी कर आरोपी के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक ने कुल चार गवाहों को न्यायालय में परीक्षित कराया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी पाते हुए सात वर्ष के सश्रम कारावास और 12 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।

अवैध चाकू रखने के दोषी को सजा
जिले के निजामाबाद थाना में पंजीकृत अवैध शस्त्र रखने के एक मामले में न्यायालय ने आरोपी को दोषी पाते हुए जेल में बिताई गई अवधि के कारावास और तीन हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। यह फैसला न्यायालय एसीजेएम-10 रश्मी चंद ने सुनाई। 14 मई 2012 को वादी मुकदमा कांस्टेबल विजेंद्र प्रताप सिंह फरिहा द्वारा थाने पर लिखित तहरीर दी गई थी कि आरोपी शमसाद उर्फ गुड्डू निवासी फरिहां थाना निजामाबाद के कब्जे से एक अवैध चाकू बरामद हुई है। इस संबंध में थाना निजामाबाद में आर्म्स एक्ट के तहत प्राथमिकी पंजीकृत किया गया था। 
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पुलिस द्वारा विवेचना पूर्ण कर आरोपी के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया गया। न्यायालय में सुनवाई के दौरान जुर्म स्वीकार करने के आधार पर तीन अप्रैल 2026 को न्यायालय एसीजेएम-10 रश्मी चंद की कोर्ट ने आरोपी शमसाद उर्फ गुड्डू को दोषसिद्ध पाते हुए जेल में बिताई गई अवधि के कारावास और 3000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।

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