जिला अस्पताल से लेकर जिले की सीएचसी-पीएचसी तक सरकार की मंशा के अनुरूप मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। सीएचसी और पीएचसी पर केवल प्रथम उपचार देने के बाद जिला अस्पताल रेफर करना चलन बन गया है, जिसका परिणाम है कि यह अस्पताल सिर्फ सर्दी, जुकाम और बुखार के मरीजों तक सीमित होकर रह गए हैं।
जिले में मंडलीय अस्पताल और जिला महिला अस्पताल के अलावा तीन शैय्या अस्पताल, 21 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 72 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अलावा अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी स्थापित हैं। वर्तमान में यह सरकारी अस्पताल सिर्फ सर्दी, खांसी और जुकाम का इलाज करने तक सीमित होकर रह गए हैं। क्योंकि यहां दुर्घटना के बाद आने वाले मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। अगर मरीज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचता है तो उसे मंडलीय अस्पताल के लिए रेफर किया जाता है। वहीं मंडलीय अस्पताल में घायल होकर आने वाले मरीजों को हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया जाता है। इन अस्पतालों में तैनात चिकित्सक कभी अस्पताल में ओपीडी के बाद मौजूद नहीं रहते हैं, जिसके कारण ओपीडी के बाद अस्पताल आने वाले मरीजों को रेफर किया जाता है।
एक महीने में 19 भर्ती 16 रेफर
मेंहनगर। मेंहनगर सीएससी में 20 नवंबर से 20 दिसंबर के बीच कुल 19 मरीज पहुंचे। इनमें से सीएचसी पर हल्की फुल्की चोट वाले तीन मरीजों का इलाज करके छोड़ दिया गया। जबकि 16 मरीजों को मंडलीय अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया।
छह मरीज आए सभी हुए रेफर
रानी की सराय कस्बा जो दुर्घटना का हॉट स्पाट बना हुआ है। आए दिन कस्बे में दुर्घटना होती रहती है। सीएससी रानी की सराय में 20 नवंबर से 20 दिसंबर के बीच कुल छह मरीज आए। सभी को इलाज के लिए मंडलीय अस्पताल रेफर किया गया।
अगर कोई गंभीर घायल है तो उसे ही रेफर किया जाता है। लेकिन अगर हल्की चोट पर ही किसी मरीज को रेफर किया जा रहा है तो इसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी। - डाॅ. आईएन तिवारी, सीएमओ।