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आलू की फसलों में बढ़ी झुलसा रोग की संभावना

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आजमगढ़। जिला कृषि रक्षा अधिकारी सुधीर कुमार ने बताया कि बदल और नमी के कारण फसलों में कीट एवं रोगों की समस्या आ जाती है। आलू की फसल में झुलसा लगने की आशंका है।
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झुलसा रोग में पत्तियों पर भूरे एवं काले धब्बे दिखाई पड़ते है। तीव्र प्रकोप होने पर संपूर्ण पौधा झुलस जाता है। फसल पर रोग के लक्षण दिखने पर कॉपर आक्सी क्लोराइड 50 प्रतिशत डब्ल्यूपी एक किग्रा या मैकोजेब 75 प्रतिशत डब्ल्यूपी 0.800 किग्रा या जिनेब 75 प्रतिशत डब्ल्यूपी 0.800 किग्रा में से किसी एक रसायन का 250 से 300 लीटर पानी में घोल कर प्रति एकड़ छिड़काव करें। 8-10 दिन के अंतराल पर पुन: छिड़काव करें।
उन्होंने बताया कि राई या सरसों की फसल में माहू कीट के प्रकोप की भी आशंका है। माहू हल्के स्लेटी या हरे रंग के छोटे कीट होते हैं। ये पौधों के कोमल तने, पत्तियों, फूलों का रस चूसकर उसे कमजोर कर देेते हैं। पत्तियों पर मधुश्राव करते हैं, जिससे काले कवक का प्रकोप हो जाता है। डायमेथोएट 30 प्रतिशत ईसी का एक लीटर या क्लोरोपायरीफास 20 प्रतिशत ईसी का एक लीटर या मिथाइल ओडेमिटान 25 प्रतिशत ईसी का एक लीटर, में से किसी एक का 500 से 700 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करके इससे बचा जा सकता है।
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