जनपद के निजामाबाद कस्बे का ब्लैक पाटरी उद्योग किसी परिचय का मोहताज नहीं है। इस उद्योग का डंका पूरी दुनिया में बजता है। इस उद्योग से जुड़े 18 उद्यमियों को राज्य दक्षता पुरस्कार और तीन को राष्ट्रपति पुरस्कार से नवाजा जा चुका है। इसके बाद भी आज इस उद्योग से जुड़े लोग रोजी रोटी की तलाश में पलायन कर रहे हैं। उनका मानना है कि उद्योग को यदि बाजार मिल जाए तो इसे बचाया जा सकता है।
निजामाबाद कस्बे के लगभग 250 परिवार के लोग कुंभकारी कला से जुड़े हैं। लेकिन शासन और प्रशासन की उपेक्षा के चलते यह उद्योग धीरे-धीरे दम तोड़ता जा रहा है। इस कार्य में लगे लोग गैर प्रांतों में पलायन कर रहे हैं। इस कला से जुड़े महेंद्र प्रजापति का कहना है कि जब हम अपने उत्पादों की कहीं पर प्रदर्शनी लगाते हैं तो हमसे पूछा जाता है कि आपके बर्तन किस तापमान पर पके हैं। हमारे पास कोई जवाब नहीं होता है क्योंकि हमारे पास इलेक्ट्रानिक भट्ठी नहीं है जिससे हम तापमान की माप कर सकें। हम पुराने तरीके से बर्तनों को पकाते हैं जो एक अनुभव पर आधारित होता है। दूसरे अब हमें मिट्टी को खरीदना पड़ता है क्योंकि जहां से हम पहले मिट्टी लेते थे वहां पर दबंगों का कब्जा हो गया है।
सोहित प्रजापति का कहना है कि अब कस्बे में लगभग सभी लोगों के पास इलेक्ट्रानिक चाक है जो बिना बिजली के बेकार है। अगर हमें पर्याप्त मात्रा में बिजली मिली तो हमें काफी सुविधा होगी। कृष्ण मोहन प्रजापति का कहना है कि बैंकों में बिना घूस लिए लोन को पास नहीं किया जाता है। जिससे हमारा काफी पैसा घूस में चला जाता है। जबकि उसे भरना हमें पड़ता है। ऊपर से इतनी खानापूर्ति करनी पड़ती है कि बहुत से लोग दूसरों से पैसा लेकर अपने रोजगार को करते हैं।
रामजतन प्रजापति ने कहा कि सामान को बनाने के बाद इसे बेचने का कोई बाजार जनपद में नहीं है। जिस प्रकार मुबारकपुर में बुनकरों के लिए विपणन केंद्र बनाया जा रहा है। अगर उसी तरह की कुछ व्यवस्था यहां हो जाए तो हमें काफी फायदा मिलेगा। साथ ही सामानों को विदेश में ले जाकर बेचने की सुविधा और पासपोर्ट बनाया जाए तो उद्योग से जुड़े लोगों को सुविधा होगी। ऐसे में उनका पलायन रुकेगा।