मऊ। जनपद में 22 अप्रैल को हुई दिशा की बैठक के बाद मीडिया से वार्ता करते हुए भाजपा एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने आजमगढ़ के जीयनपुर कोतवाली क्षेत्र में हुई मुठभेड़ को फर्जी करार देते हुए आजमगढ़ का पुलिस कप्तान को अपराधी बताया और कहा कि उनकी जगह जेल में है। उनके इस बयान ने शुक्रवार को उस समय तूल पकड़ लिया जब सपा मुखिया अखिलेश यादव ने अपने फेसबुक एकाउंट से ''जब तक लूट में रहा बराबर बंटवारा, तब तक ही बना रहा इनमें भाईचारा'' लिखकर पोस्ट किया। इस पोस्ट के बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई।
भाजपा एमएलसी ने कहा कि वादी ने अपने एफआईआर में लिखा है कि कुछ अज्ञात लोग उसके घर के दो सौ मीटर पहले उस पर हमला कर दिए थे। इस दौरान उसका बैग जिसमें लैपटॉप था गिर गया था। उसने खुद स्वीकार किया कि लैपटॉप गिर गया था। इसमें लूट वाली कोई बात नहीं है। इसमें प्राथमिकी में कोई चिह्नित भी नहीं है। पुलिस ने गुडवर्क के चक्कर में फर्जी बूथ अध्यक्ष का एनकाउंटर कर दिया। आंख पर पट्टी बांधकर गोली मार की इसलिए पुलिस कप्तान को निलंबित किया जाए। उसकी जगह जेल में है।
28 मार्च को कोतवाली प्रभारी यादवेंद्र पांडेय और उनकी टीम मोहटी घाट पर मुठभेड़ के दौरान धर्मेन्द्र सिंह उर्फ अभिषेक सिंह को घायलावस्था में गिरफ्तार किया था। पुलिस ने उसे जेल भेज दिया था। इसके बाद जब ये पता चला कि धर्मेंद्र सिंह भाजपा का बूथ अध्यक्ष भी है तो पुलिस मामले को शांत करने में जुट गई। उधर, भाजपा नेताओं के साथ ही करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीरू सिंह ने मामले को गरमा दिया। इसी बीच भाजपा एमएलसी देवेंद्र सिंह भी धर्मेंद्र सिंह के घर पहुंचे थी और पूरी कहानी सुनी। उन्होंने मुठभेड़ को फर्जी करार दिया था। वहीं अब मऊ में दिए उनके बयान और अखिलेश के कमेंट से सियासी पारा और गर्म हो गया है।