मुबारकपुर क्षेत्र में शिया-सुन्नी देंगे के दौरान हुए अली अकबर हत्याकांड में 27 साल बाद अदालत ने फैसला सुनाया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश जय प्रकाश पांडेय ने शुक्रवार को इस घटनाक्रम में 12 लोगों को दोषी करार दिया। दोषियों में तीन सगे भाई हैं। सुनवाई के दौरान चार आरोपियों की मौत हो चुकी है। अदालत ने सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए 17 फरवरी की तिथि तय की है।
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क्या है पूरा मामला
मुबारकपुर थाना क्षेत्र के गांव पूरा सोफी में 10 फीट जमीन के लिए शिया और सुन्नी समुदाय के लोगों में विवाद चल रहा था। 27 अप्रैल 1999 को शिया समुदाय के लोग मोहर्रम का जुलूस निकाल रहे थे। इसी दौरान दूसरे पक्ष की ओर से जुलूस रोकने पर विवाद हो गया। पथराव भी हुआ था। पुलिस प्रशासन ने किसी तरह हालात काबू किए थे। शाम को पूरा ख्वाजा के अली अकबर ताजिया दफन करने हैदराबाद स्थित शाह के पंजे पर गए थे। इसके बाद वह लापता हो गए थे। अली अकबर के पुत्र जैगम ने 28 अप्रैल को थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई थी।
30 अप्रैल को अली अकबर की सिर कटी लाश राजा भाट के पोखरे में मिली थी लेकिन सिर आज तक नहीं मिल सका। 30 अप्रैल को ही भतीजे नासिर हुसैन ने मुबारकपुर थाने में हत्या की प्राथमिकी कराई थी। पुलिस की विवेचना में सामने आया कि मोहर्रम के जुलूस से लौटते समय अली अकबर की पीटकर हत्या कर दी गई थी।