सत्ताधारी दल से जुड़ा होने के चलते मामला दबाने का हुआ प्रयास
छापे की कार्रवाई तक विभागीय टीम व विजलेंस को मामले के सत्ताधारी दल से जुड़े होने की जानकारी नहीं थी। मुकदमा दर्ज कराने और 70 लाख जुर्माना लगाने की कार्रवाई होने के बाद यह पता चला कि प्रकरण सत्ताधारी दल व भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष के परिवार से जुड़ा है तो महकमा पूरे मामले को दबाने में जुट गया। मंगलवार को इतनी बड़ी कार्रवाई हुई और मीडिया को इसकी भनक तक नहीं लगने दी गई। दूसरे दिन मामला मीडिया तक पहुंच गया तब मजबूरी में विभाग की ओर से पूर्व जिलाध्यक्ष के भतीजे के खिलाफ कार्रवाई, जुर्माना व बिजली चोरी की जानकारी दी गई।